दिल्ली में अब शराब पर डिस्काउंट नहीं !

by GoNews Desk 1 year ago Views 2527

No discount on liquor in Delhi now!
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली आबकारी विभाग (Delhi Excise Department) के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें शराब की दुकानों द्वारा दिए जा रहे डिस्काउंट ऑफर पर रोक लगाई गई थी।

कोर्ट में आदेश के ख़िलाफ़ L7Z शराब लाइसेंसधारियों ने एक याचिका दायर की थी जिसपर कोर्ट ने अपना यह फैसला सुनाया है। जस्टिस वी कामेश्वर राव की सिंगल-जज बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी।


याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवरी और साजन पूवैया पेश हुए और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और राहुल मेहरा ने कोर्ट में दिल्ली सरकार का पक्ष रखा।

अपने आदेश में, दिल्ली आबकारी विभाग ने कहा था: “यह संज्ञान में आया है कि लाइसेंस द्वारा खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से दी जा रही छूट की वजह से शराब की दुकानों पर भारी भीड़ जुट रही है है। ऐसे में क़ानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो गई है और स्थानीय आबादी के लिए मुश्किलें पैदा हुई है। यह ध्यान में रखना होगा कि कोरोना संक्रमण का प्रकोप अभी ख़त्म नहीं हुआ है और संक्रमण फैलने का ख़तरा बरक़रार है।”

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हाई कोर्ट में दिल्ली आबकारी विभाग के जून 2021 के उस आदेश के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई थी, जिसमें सरकार ने लाइसेंस शुल्क में वैट और एक्साइज़ चार्ज दोनों को एक साथ शामिल कर दिया था। हालांकि पहले के नियम के मुताबिक़ लाइसेंस शुल्क अलग थे और उसपर अलग से 25 फीसदी तक वैट लगाया जाता था।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि नई एक्साइज़ पॉलिसी और टेंडर खुदरा विक्रेताओं को "छूट की मात्रा और प्रकृति" की परवाह किए बिना छूट की अनुमति देता है। याचिकाकर्ता के वकील साजन पूवैया ने तर्क दिया कि मौजूदा क़ानून व्यवस्था के आधार पर टेंडर बुलाई जाती है, और फिर उक्त टेंडर के हिसाब से लाइसेंस जारी किए जाते हैं, तो विभाग क़ानून के हस्तक्षेप के बिना टेंडर में कोई बदलाव नहीं कर सकता है।

दिल्ली सरकार शराब की बिक्री बढ़ाने पर विचार कर रही है, लेकिन छूट बंद कर देगी!

अरविंद केजरीवाल सरकार ने 2021 में दिल्ली की शराब पीने की आयु सीमा को 25 से घटाकर 21 करने के पक्ष में यह तर्क दिया था कि इस तरह के प्रतिबंधों से पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के नोएडा के ग्राहकों को नुक़सान होता है, और सरकार ने रियायती बिक्री को रोकने के लिए यह क़दम उठाए हैं।

जबकि शराब के ख़ुदरा विक्रेता इस वित्तीय वर्ष जो 31 मार्च को ख़त्म हो रहा है, तक अपने स्टॉक को ख़त्म करना चाहते हैं और दिल्ली सरकार चाहती है कि उसे एक्साइज़ चार्ज से होने वाली कमाई का नुक़सान ना हो।

इसलिए यह अनिवार्य किया गया है कि खुदरा विक्रेता एमआरपी पर ही शराब बेचेंगे। केन्द्र और राज्य सरकार की कुल कमाई में एक्साइज़ चार्ज का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

3 मार्च, गुरुवार को, दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि वो खुदरा विक्रेताओं को छूट की इजाज़त देकर शराब को बढ़ावा नहीं दे सकती। सरकार ने आगे तर्क दिया कि अगर ऐसा किया जाता है तो बड़े विक्रेता द्वारा डिस्काउंट ऑफर की वजह से बाज़ार में एकाधिकार आ जाएगी।

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