दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना दूभर, राजधानी में 486, गुरुग्राम में AQI 500 के पार हुआ

by Ankush Choubey 3 years ago Views 1499

Difficulty in Breathing in Delhi-NCR, 486 in the c
दिल्ली-एनसीआर में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। अभी दिल्ली में पटाखे फूटे ही नहीं लेकिन पूरी दिल्ली दिवाली से पहले धुएं के गुबार में तब्दील है। सोमवार सुबह से दिल्ली के कई क्षेत्रों में घना धुआं छाया रहा जिससे रोजाना व्यायाम और सैर करने निकलने वालों को सांस लेने में काफी समस्याओं का समना करना पड़ा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के मोबाइल ऐप समीर के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 500 के करीब दर्ज किया गया। जो बेहद गंभीर श्रेणी में आता है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर 8 में वायु की गुणवत्ता सबसे दुषित रही, यहाँ पर सोमवार सुबह AQI 488 दर्ज किया गया।


इसके आलावा विवेक विहार में 486, आनंद विहार में AQI 485, प्रतापगंज इलाक़े में 484, आईटीओ इलाक़े में एक्यूआई 477, दिल्ली एयरपोर्ट पर 474, लाजपत नगर में 473, मुंडका में 470, सेंट्रल ओखला में चरण 2 और वज़ीरपुर में AQI 468-468 दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली के वहीं अक्षरधाम इलाके में भी प्रदूषण और काफी धुंध की चादर नज़र आई।

दिल्ली से सटे गुरुग्राम की हालत सोमवार को दिल्ली से भी ज्यादा बत्तर रहे। गुरुग्राम के सेक्टर 51 में पीएम 2.5 का स्तर 501 दर्ज किया गया, गुरुग्राम के विकास खंड में AQI 489 जबकि मानेसर में AQI 484 दर्ज किया गया।

अगर नोएडा-ग़ाज़ियाबाद की बात करें तो यहाँ भी प्रदूषण की वजह से लोगों को साँस लेना बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क 5 में AQI 490 दर्ज किया गया, नोएडा सेक्टर 62 में AQI 481 तो सेक्टर 116 में 478 दर्ज किया गया। जबकि ग़ाज़ियाबाद में संजय नगर में AQI सबसे ज्यादा 486 दर्ज किया गया।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली एनसीआर में आज आधी रात से 30 नवंबर तक के लिए सभी पटाखों की बिक्री और पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।

हालाँकि, इससे पहले रविवार को दिल्ली के 35 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 31 में हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वायु गुणवत्ता निगरानी सिस्टम ‘सफर’ का आंकलन है कि सतह पर चलने वाली हवाएं तकरीबन शांत पड़ी हैं। इससे पराली के धुएं का हिस्सा कम होने के बावजूद हवा की गुणवत्ता पर ख़ास सुधार नहीं दिखा।

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