Bihar Politics: नीतीश कुमार ने मुकेश साहनी को मंत्रिमंडल से बरख़ास्त किया !

by GoNews Desk 2 years ago Views 23191

Bihar Politics: Nitish Kumar sacks Mukesh Sahni fr
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्री मुकेश साहनी को उनके मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी सिफारिश सहयोगी भाजपा के एक "लिखित निवेदन" के बाद राज्यपाल को भेजी गई, जिसमें कहा गया था कि मुकेश साहनी "अब एनडीए का हिस्सा नहीं हैं"।

राज्य के सूचना और जनसंपर्क विभाग ने अपने आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर इसकी पुष्टि की है जिसमें बताया गया कि, “भाजपा द्वारा मुकेश साहनी को मंत्री के रूप में बर्ख़़ास्त करने का अनुरोध करने के बाद, सीएम ने राजभवन को इसकी सिफारिश की है। बीजेपी ने सीएम को लिखे अपनी चिट्ठी में कहा कि 'चूंकि साहनी अब एनडीए का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए उन्हें मंत्री पद से हटा दिया जाना चाहिए।'


2020 के बिहार चुनावों में, भाजपा ने अपने एनडीए कोटे से वीआईपी को 11 सीटें दी थीं। इन सीटों से वीआईपी ने चुनाव लड़ा और चार सीटें जीती। तीन वीआईपी विधायक शुरू से ही अनाधिकारिक रूप से भाजपा समर्थक थे। 

हालांकि मुकेश साहनी तोड़-जोड़ के मामले में माहिर माने जाते हैं। वो अपना चुनाव भी हार गए थे लेकिन वो गठबंधन का हिस्सा थे इसलिए उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया गया था और उन्हें मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्रालय दिया गया था।

रविवार को, बर्खास्त करने से पहले, बिहार भाजपा प्रमुख संजय जायसवाल ने साहनी आरोप लगाया कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में एक आदेश के माध्यम से एक पंजीकृत सोसायटी, प्रखंड मत्स्यजीवि सहयोग समिति के संगठनात्मक ढांचे के साथ छेड़छाड़ करके मछली पकड़ने वाले समुदाय को बड़ा नुक़सान पहुंचाया है।

जायसवाल ने आरोप लगाया कि साहनी ने मंत्री के रूप में, सहकारी समिति में मंत्रियों के पदों को हटा दिया और एक कार्यकारी निकाय का गठन किया, जो एक नौकरशाह के नियंत्रण में रहा है।

भाजपा का आरोप  है कि मंत्री के रूप में मुकेश साहनी के आदेश 13 सदस्यीय ब्लॉक-स्तरीय मछुआरों के निकाय के बजाय नौकरशाहों को ज़्यादा अधिकार की कोशिश करते हैं।

नए आदेश में प्रखंड स्तरीय सहकारी समिति का चुनाव करने वाले मछुआरों को ऑनलाइन सदस्य बनाने की व्यवस्था का भी प्रावधान है। लेकिन नया आदेश यह परिभाषित नहीं करता है कि "मछुआरे" कौन हैं।

मुकेश साहनी ने पिछले दिनों कहा था कि एनडीए  में शामिल होना उनके लिए एक 'ग़लती' थी। इसके बाद उनकी पार्टी के तीन विधायक पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे। जिनमें राजू कुमार सिंह (साहेबगंज), मिश्री लाल यादव (अलीनगर) और स्वर्ण सिंह (गौरा बौराम) शामिल हैं।

आपको बता दें कि साहनी विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक प्रमुख हैं जिन्होंने राजद गठबंधन छोड़ 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए से जुड़ गए थे।

वीआईपी के तीन विधायकों के बीजेपी में शामिल होने के बाद वो विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। बीजेपी ने चुनाव में 77 सीटें जीती थीं और अब उनके पास 80 विधायक हैं और जेडीयू के पास 45 विधायक हैं। ऐसे में वीआईपी विधायकों का यह क़दम नीतीश कुमार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।

बिहार विधासभा में एनडीए के पास कुल 127 विधायकों का समर्थन है। जबकि विपक्षी राजद गठबंधन के पास 91 और कांग्रेस जो अब राजद गठबंधन का हिस्सा नहीं है, के पास 19 और पांच विधायक एआईएमआईएम के हैं।

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