‘विज्ञापनजीवी’ : पोषण अभियान के 56 फीसदी आवंटन का इस्तेमाल, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का 446 करोड़ विज्ञापनों पर ख़र्च

by Sarfaroshi 2 years ago Views 2247

Poshan Abhiyaan

केंद्र और राज्य सरकारों ने तीन सालों में पोषण अभियान के तहत मिले फंड का सिर्फ 56% ही इस्तेमाल किया है। यह जानकारी केंद्र ने संसद में बुधवार को साझा की। केंद्रिय मंत्री स्मृति ईरानी ने राज्यसभा में कहा कि अभियान के तहत 2019-21 के बीच जारी किए गए 5,321 करोड़ में से सिर्फ़ 2,985 करोड़ ही इस्तेमाल हुए। इतना ही नहीं अन्य महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के लिए आवंटित राशी में करीब साढ़े चार सौ करोड़ रूपये केंद्र की मोदी सरकार ने विज्ञापनों पर ख़र्च कर दिए।

क्या है पोषण अभियान ?

पोषण अभियान को 2018 में शुरू किया गया था, जिसका मक़सद कुपोषण की समस्या को कम करना था। इसके तहत 2022 तक भुखमरी, अल्पभार और जन्म के समय कम भार जैसी समस्याओं को 2 प्रतिशत और बच्चों, किशोरों और महिलाओं में खून की कमी की परेशानी को 3 फ़ीसदी तक कम करने का लक्ष्य था। 

उत्तर प्रदेश फंड इस्तेमाल करने में सबसे पीछे!

उत्तर प्रदेश पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से एक है जहां पोषण अभियान के तहत सबसे कम फंड इस्तेमाल हुआ। आवंटित किए गए कुल बजट का 33.73 फ़ीसदी ही राज्य ने इस्तेमाल किया। द हिंदु अख़बार ने ICDS-RRS के हवाले से 30 जुलाई, 2021 की अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि भारत में 6 महीने से 6 साल के बीच 9,27,606 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं, इनमें से 3,98,359 सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में हैं।

यूपी के अलावा पंजाब (33.62%), लद्दाख, (31.2%), पुडुच्चेरी, (28.03%) और अरूणाचल प्रदेश, (25.14%) ने भी सबसे कम फंड इस्तेमाल किया है। 

पूर्वोत्तर में पोषण अभियान फंड का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल

वह पांच राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जिन्होंने Nutrition Mission के तहत मिले फंड का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया, इनमें चार पूर्वोत्तर के हैं। नागालैंड ने (98.34%), मेघालय ने (98.14%), मिज़ोरम ने (94.22%), और सिक्किम ने 93.13 फ़ीसदी फंड का इस अभियान के तहत इस्तेमाल कर लिया है। केंद्र शासित प्रदेश दादरा नगर हवेली ने 88.2 प्रतिशत फंड का प्रयोग किया है।  

केंद्र के इस जानकारी देने से कुछ महीने पहले ग्लोबल हंगर इंडेक्स की एक रिपोर्ट सामने आई थी। इसके मुताबिक भुखमरी के मामले में 116 देशों की सूची में भारत 101 स्थान पर आ गया है। भारत में भुखमरी के गंभीर हालात को ‘चिंताजनक’ बताया गया है। उस पर देश में इस समस्या को ख़त्म करने के लिए दिए गए फंड का इस्तेमाल भी न होना कई सवाल खड़े करता है।

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का फंड विज्ञापनों पर किया जा रहा ख़र्च !

आज संसदीय समीति का एक और बयान अख़बारों में छाया रहा। इस बयान में समीति ने कहा कि केंद्र सरकार के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के तहत जारी किए फंड का 79 प्रतीशत हिस्सा सिर्फ़ विज्ञापन पर ख़र्च किया गया। 2014-15 में शुरु किए गए इस अभियान का लक्ष्य पिछड़े क्षेत्रों में बच्चों में लिंग अनुपात सुधारना और लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करना था।

लेकिन 2016-19 के बीच केंद्र के इस महत्वाकांक्षी योजनाओं में एक के लिए जारी फंड का 446.72 करोड़ रूपये विपज्ञापनों पर ख़र्च किए गए। समीति ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है और कहा है कि अभियान के तहत फंड का   ठीक इस्तेमाल किया जाए।

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