कोरोना की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में गर्भपात दर 3 गुना ज़्यादा

by Sarfaroshi 2 years ago Views 2124

Spontenious Abortion Rate

कोरोना संक्रमण ने अलग अलग स्थितियों से गुज़र रहे लोगों पर अलग अलग प्रभाव डाले हैं।भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद  की एक स्टडी बताती है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में पहली लहर के मुकाबले तीन गुना ज़्यादा गर्भपात हुए। ICMR के इस शोध में 1,630 कोरोना संक्रमित महिलाओं का अध्ययन किया गया।

इन महिलाओं का 1 अप्रैल 2020 से 4 जुलाई 2021 के बीच मुंबई स्थित बी.वाई.एल. नायर चैरिटेबल अस्पताल में ‘सहज गर्भपात’ हुआ था। स्टडी में गर्भपात के लिए ‘सहज गर्भपात’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है यानि ऐसा गर्भपात जो गर्भधारण के 20 हफ्ते से पहले हुआ हो या फिर 500 ग्राम से कम वज़न वाले भ्रूण का जन्म। 

शोधकर्ताओं ने पाया कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में प्रति 1000 महिलाओं पर सहज गर्भपात की दर 82.6 से ज़्यादा थी जबकि कोविड की पहली लहर के दौरान यह दर 26.7 थी।

अध्ययन यह भी बताता है कि प्री-पेंडमिक एरा (2017-18) यानि महामारी से पहले भी अगस्त से जनवरी की तुलना में फरवरी से जुलाई की अवधि के दौरान अधिक गर्भपात होते रहे जबकि महामारी की दूसरी लहर के दौरान फरवरी-जुलाई 2021 के बीच सहज गर्भपात की दर में और ज़्यादा बढ़ोतरी हुई। 

स्टडी में कोविड के डेल्टा वेरिएंट को सहज गर्भपात की दर में हुई वृद्धि के लिए संभावित कारण माना गया है। संक्रमण के इस वेरिएंट को देश में आई कोरोना की दूसरी लहर के लिए काफी हद तक ज़िम्मेदार माना गया है। गर्भवती महिलाओं में भी वह महिलाएं जो गर्भधारण की पहली या दूसरी तिमाही में थी, उनमें महामारी से पहले की तुलना में कोविड के दौरान गर्भपात दर ज़्यादा थी।

स्टडी कहती है कि सहज गर्भपात में वृद्धि के पीछे कोरोनावायरस का अत्यधिक संक्रामक और घातक वैरिएंट डेल्टा एक बड़ी वजह हो सकता है। शोध कहता है कि कोविड गर्भनाल को संक्रमित कर सकता है और संभव है कि भ्रूण के विकास पर उल्टा असर हो हालांकि शोध में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी, यात्रा पर लगी पाबंदियों के चलते गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंचने में देरी जैसे फैक्टर को सहज गर्भपात का संभव कारण माना गया है। 

अध्ययन कहता है कि कोरोना ने गर्भवती महिलाओं पर खासा बुरा असर डाला है। खासकर निम्न और मध्य आय वाले देशों की महिलाएं इससे अधिक प्रभावित हुई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में पहली बार अगस्त 2020 में कोविड संक्रमित गर्भवती महिला का गर्भपात हुआ था। महिला की जांच में पता चला कि उसके पेट में पल रहा भ्रूण 'हाइड्रोप्स फ़ेटेलिस' नाम की स्थिति का शिकार हुआ था। जिसमें शरीर में असमान्य मात्रा में द्रव इकट्ठा हो जाता है। बच्चे की ऐसी स्थिति होने का संभव कारण सूजन को बताया गया था।

इस कोरोना संक्रमण और गर्भपात में संबंध से जुड़ी कई स्टडी की गई हैं हालांकि अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि क्यों संक्रमण कुछ गर्भवती महिलाओं के प्लेसेंटा यानि गर्भनाल को प्रभावित करता है जबकि कुछ को नहीं। कुछ शोध में पता चला है कि हालांकि गर्भनाल ही भ्रूण को बाहरी संक्रमण से बचाती है लेकिन यह कोविड के लिए संग्रह का काम भी कर सकती है ताकि प्लसेंटा में रहकर कोरोना संक्रमण फैल सके। 

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