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'सऊदी अरब और ईरान’ दो मुस्लिम बहुल देशों में क्यों है मतभेद ?

by M. Nuruddin 6 months ago Views 6958

Why are there differences between two muslim major
सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज़ अल सऊद ने गुरुवार को दुनिया के नेताओं से ईरान के ख़िलाफ़ ‘निर्णायक रुख’ अपनाने की अपील की है। सऊदी किंग ने कहा कि ईरान द्वारा विकसित की जा रही परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल दुनिया के लिए ख़तरा पैदा करेगा।

उन्होंने अपने एक संबोधन में कहा, ‘सऊदी, ईरान के क्षेत्रीय परियोजना के ख़तरों, अन्य देशों में इसके हस्तक्षेप, आतंकवाद, संप्रदायवाद की आग को भड़काने की ईरान की कोशिशों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निर्णायक रुख़ की अपील करता है।’ सऊदी किंग ने आरोप लगाया कि ईरान की ये कोशिशें सामूहिक विनाश का कारण बनेंगी।


इससे पहले सऊदी के किंग ने सितंबर में ईरान के ख़िलाफ़ पहली सार्वजनिक टिप्पणी की थी, जहां उन्होंने इसके ‘विस्तारवाद’ की आलोचना की। बता दें कि सुन्नी मुस्लिम बहुल सऊदी और शिया मुस्लिम बहुल ईरान पिछले पांच सालों से तेहरान इलाक़े में एक प्रॉक्सी वॉर की चपेट में हैं।

इनके अलावा दोनों देशों के बीच यमन में भी ठनी हुई है, जहां सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन ईरानी नेतृत्व वाले गठबंधन के हौथी आंदोलन का विरोध कर रहा है। हौथी आंदोलन ईरान के शिया अल्पसंख्यकों का एक आंदोलन है जो ख़लीफा में विश्वास करते हैं। शिया के हौथी समुदाय ने ही 740 ईश्वी में पहली इस्लामी राजवंशीय साम्राज्य ‘उमय्यद साम्राज्य’ को ख़त्म किया था।

यही वजह है कि इस आंदोलन का सऊदी अरब लगातार विरोध करता रहा है। हालांकि ईरान की ओर से इसपर फिलहाल कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन उनका कहना है कि सऊदी किंग के आरोप ‘निराधार’ हैं।

अशान्ति की वजह क्या ?

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका को परमाणु समझौते से बाहर किए जाने के बाद से इन इलाक़ों में तनाव और ज़्यादा बढ़ गया है। इसके बाद ही ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने ईरान पर कई अन्य आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए थे। हालांकि अमेरिका के प्रेसिडेंट इलेक्ट, जो बाइडन ने, सऊदी के साथ फिर से अमेरिकी नीतियों को बेहतर बनाने की कोशिश में हैं, जो एक बड़ा तेल निर्यातक देश होने के साथ अमेरिकी हथियारों का ऐक बड़ा ख़रीदार है।

इसके अलावा सऊदी अरब राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान पर कार्रवाई का समर्थक रहा है। लेकिन बाइडन का यह भी कहना है कि वो वर्ल्ड पावर और तेहरान के बीच 2015 के परमाणु समझौते पर बातचीत कर मामले का निपटारा करेंगे।

उधर यमन में लंबे समय से जारी युद्ध को लेकर सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने भी कहा है कि वो एक राजनीतिक समझौते पर पहुंचने के लिए युनाइटेड नेशन के साथ मिलकर काम कर रहा है। जिससे इलाक़े में शांति क़ायम किया जा सके।

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