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जाते-जाते अफ़गानिस्तान सहित कई देशों से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलायेंगे ट्रंप

by M. Nuruddin 5 months ago Views 6640

Trump will call back American troops from many cou
चुनावी हार के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक्शन में हैं। जनवरी तक उन्हें व्हाइट हाउस ख़ाली करना है लेकिन वे नीतिगत फ़ेसले लेने से हिचक नहीं रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और सोमालिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया है। हालाँकि ख़ुद ट्रंप की रिपबल्किन पार्टी में इस नीति का विरोध हो रहा है।

सोमवार को सामने आये पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में तैनात 2500 सैनिकों को वापस बुलाया जाएगा। इसके अलावा इराक़ से 2500 और सोमालिया में तैनात सभी 700 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया गया है।


न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले महीने ट्रंप ने अपनी एक ट्विटर पोस्ट में अफ़ग़ानिस्तान में तैनात सभी अमेरिकी सैनिकों को क्रिसमस तक वापस बुलाने का ऐलान किया था। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने की चेतावनी दी थी और राष्ट्रपति ट्रंप ने भी तब इस पर अपनी सहमति जताई थी।

माना जा रहा है कि अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप अपना अंतिम आदेश इसी हफ्ते में जारी कर सकते हैं। ट्रंप, व्हाइट हाउस में 20 जनवरी तक बने रहेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के 4500 सैनिक तैनात हैं। इसी तरह इराक़ में अमेरिका के 3000 सैनिकों की तैनाती है।

अमेरिका रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन ने सोमवार को अपने एक बयान में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान नेशनल डिफेंस और सुरक्षा बल अपने देश की सुरक्षा करना में सक्षम हैं। हालांकि अफग़ानिस्तान के जानकार मानते हैं कि ऐसा करने से सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ सकती है, लिहाज़ा ज़िम्मेदारी के साथ इस काम को करने की ज़रूरत है। उधर पाकिस्तान, ईरान और रूस ने भी अमेरिका से अपील की है कि ज़िम्मेदारी के साथ सैनिकों की वापसी की जानी चाहिए।

ट्रंप प्रशासन का यह फैसला तब आया है जब अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा की वारदात बढ़ी है। माना जा रहा है कि अचानक सैनिकों की वापसी से बाकी सैनिकों के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है। यही नहीं हाल ही में तालिबान और अफगान सरकार के बीच हुए शांति समझौते के भी कमज़ोर पड़ने की आशंका है।

राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के ही एक सांसद ने विरोध किया है। अमेरिकी सीनेट में सांसद मिच मैककोनेल का कहना है, ‘अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की तेजी से वापसी हमारे सहयोगियों को नुकसान पहुंचाएगी और हमें नुकसान पहुंचाने वाले लोग इससे खुश होंगे।’

मैककोनेल ने कहा कि अमेरिकी सेनाओं की वापसी के परिणाम साल 2011 में राष्ट्रपति ओबामा के इराक से वापसी के फैसले से भी बदतर साबित होगा, जिस वजह से आईएसआईएस का उदय हुआ और आतंकवाद के एक नए दौर की शुरुआत हुई थी।

विदेशी झंझटों से अमेरिका को बाहर निकालना, ख़ासतौर से ‘अफ़ग़ानिस्तान’ का मसला राष्ट्रपति ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का प्रमुख हिस्सा रहा है। यही वजह रही कि राष्ट्रपति ट्रंप ने मामले को प्रमुखता देते हुए इसी साल फरवरी में तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच एक ‘शांति समझौते’ की अगुवाई की।

इस दौरान यह भी सहमित बनी थी कि 14 महीने में अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका और बाकी देश अपने सैनिक वापस बुला लेंगे। इससे अफ़ग़ानिस्तान में करीब 19 साल से जारी संघर्ष के ख़त्म होने की उम्मीद जतायी गयी थी लेकिन जानकार इस नीति पर संदेह जता रहे हैं।

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