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ट्रम्प ने रक्षा बजट पर लगाया वीटो पर अमेरिकी कांग्रेस पलट सकती है फ़ैसला

by Rahul Gautam 3 months ago Views 16309

ट्रम्प ने बिल के कई प्रावधानों पर ऐतराज़ जताया है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी सैनिक ठिकानों के असली नाम बदले जा सकते हैं जो देश की पहचान और इतिहास मिटाने जैसा होगा।

US Congress may decide on Trump's veto on defense
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने बुधवार को 740 अरब डॉलर के रक्षा बजट पर वीटो लगाते हुए अमेरिकी संसद को वापस भेज दिया। 'ट्रम्प ने 2021 मिलिट्री पॉलिसी बिल' को रूस और चीन के लिए तोहफा बताते हुए बिल पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। ट्रम्प के कार्यकाल में मात्र एक महीना बचा है, ऐसे में उनके इस क़दम से अमेरिका की राजनीति गरमा गई है। अमेरिकी कांग्रेस उनके इस फ़ैसले को पलट भी सकती है।

ट्रम्प ने बिल के कई प्रावधानों पर ऐतराज़ जताया है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी सैनिक ठिकानों के असली नाम बदले जा सकते हैं जो देश की पहचान और इतिहास मिटाने जैसा होगा। उन्होंने यह भी मांग की है कि विधेयक में सोशल मीडिया कंपनियों को कानूनी कवच प्रदान करने वाला प्रावधान भी जोड़ा जाये। उनकी इस मांग से रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसद, दोनों हैरान हैं क्योंकि मिलिट्री पॉलिसी बिल का लेना देना फ़ौज से है, न कि प्रशासनिक कार्यो से। बिल पर वीटो लगाते हुए ट्रम्प ने लिखा - "मेरे प्रशासन ने राष्ट्र को सुरक्षित रखने और सेवा तथा सुरक्षाकर्मियों के समर्थन में मजबूत कदम उठाये हैं। मैं इस बिल को मंजूरी नहीं दूंगा, जो अमेरिकी लोगों के ऊपर वाशिंगटन डी.सी. के हितों को स्थापित करेगा"


वैसे, संसद को राष्ट्रपति के फ़ैसले को पलटने का अधिकार है। सोमवार को कांग्रेस में ट्रम्प के वीटो के फैसले पर वोटिंग की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि यह साफ़ नहीं है कि कितने रिपब्लिकन सांसद अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए ऐतराज़ के खिलाफ वोट डालने का इरादा रखते हैं। अगर यह सदन में पास होता है, तो मंगलवार को सीनेट इस फैसले को पलटने के लिए बैठ सकती है।

अमेरिका के मशहूर अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रम्प का मिलिट्री पॉलिसी बिल पर वीटो लगाना दिखाता है कि वे अपने कार्यकाल के आखिरी हफ्तों में, अपनी ही पार्टी के सांसदों को चुनौती देने के लिए तैयार हैं कि या तो वे उनके प्रति अपनी वफादारी दिखायें या फिर फिर अपने राजनीतिक गुरुओं के प्रति।उन्होंने सांसदों पर ऐसा विधेयक भेजने का आरोप लगाया जो कि "महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों को शामिल करने में विफल है और जिसमे ऐसे प्रावधान शामिल हैं जो हमारे पूर्वजो और हमारे सैन्य इतिहास का सम्मान करने में भी विफल हैं।"

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि इस बिल को अस्वीकार करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प सैनिकों की वेतन वृद्धि से इनकार कर रहे हैं, साथ ही साथ वियतनाम युद्ध में भाग लेने वाले हजारों पूर्व सैनिको के दिये जा सकने वाले नये लाभ में रोड़ा अटका रहे हैं। ट्रम्प ने यह जोर देकर कहा है कि विधेयक "चीन और रूस के लिए एक 'उपहार है", हालांकि सांसदो ने इस तरह की बयानबाज़ी को खारिज किया है।

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