'Sanction Attacks': रूस पर यूरोपीय और पश्चिमी प्रतिबंध का क्या असर पड़ेगा ?

by M. Nuruddin 3 months ago Views 19693

'Sanction Attacks': What will be the effect of Eur
रूस पर पश्चिमी और यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद से रूसी करेंसी रूबल (Ruble) में भारी गिरावट देखी गई है। अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा रूस के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों के ऐलान के बाद रूबल में 30 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। 

अब जबकि यूरोपीय यूनियन ने रूस के सात बैंकों को SWIFT से बाहर करने का फैसला किया है, रूबल डॉलर के मुक़ाबले और नीचे गिर गया है। स्टेटिस्टा के एक चार्ट से पता चलता है कि अब 119 रूबल एक डॉलर के बराबर हो गया।


हालांकि साल 2000 में जब व्लामिदिर पुतिन रूस के राष्ट्रपति के तौर पर पहली बार चुने गए थे, तब 30 रूबल एक डॉलर के बराबर था। वहीं 2020 में कोरोना महामारी से पहले 60 रूबल एक डॉलर के बराबर ट्रेड कर रहा था। 

शुक्रवार को यूरोपीय यूनियन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ कई नए तरह के प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों के ज़रिये रूस को वैश्विक व्यवस्था से अलग करने की योजना है। पश्चिमी और यूरोपीय देश उन नीतियों पर ग़ौर कर रहे हैं कि वे रूस को किस तरह आर्थिक तौर पर आइसोलेट कर सकते हैं।

रूसी बैंकों को SWIFT से बाहर करने का फैसला भी पश्चिम और यूरोप के उन्हीं नीतियों की एक कड़ी है। हालांकि यूरोपीय यूनियन ने रूस के दो सबसे बड़े बैंकों/वित्तीय संस्थान पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है, जिसके माध्यम से यूरोप के कुछ प्रमुख देश रूस से ऊर्जा/गैस की ख़रीदारी करते हैं।

रूस के पास 630 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इसी पर फोकस किया है और रूस के उसके विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल से रोकने की कोशिश की है। रूबल में गिरावट की भी यह एक बड़ी वजह है। हालांकि प्रतिबंधों की वजह से रूस पूरी तरह से विदेशी करेंसी से अलग नहीं हो सका है।

रूस अभी भी ऊर्जा भुगतान के लिए अपने विदेशी भंडार का इस्तेमाल कर सकता है, जो रूसी केन्द्रीय बैंकों के लिए एक जीवन रेखा साबित हो सकती है। इनके अलावा रूस के पास अभी भी 13 फीसदी या 77 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार युआन के तौर पर मौजूद है, जिसका इस्तेमाल रूस किसी भी व्यापार के लिए कर सकता है।

इस बीच चीन प्रतिबंधों को अवैध मानते हुए रूस पर किसी तरह के प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है।

हालांकि पश्चिमी और यूरोपीय प्रतिबंधों के बाद रूस डॉलर में व्यापार नहीं कर सकेगा जिससे रूसी अर्थव्यस्था बेशक प्रभावित होगी। 

वॉल स्ट्रीय जर्नल के मुताबिक़ 1997 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद से विकासशील देशों ने अपनी करेंसी को मज़बूत करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार पर ज़्यादा फोकस किया है। तब जहां आधिकारिक भंडार 2 ट्रिलियन डॉलर से कम थी जो 2021 में बढ़कर 14.9 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। केन्द्रीय बैंक अब गोल्ड भंडार पर ध्यान दे रहा है जो फिलहाल 13 फीसदी है। जबकि विदेशी करेंसी भंडार 78 फीसदी है।

इस बीच जब रूस पर चौतरफा “Sanction Attack” हो रहा है, ‘Bank of Russia’ ने अपनी ब्याज़ दरों को 9.5 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है। वहीं बीते सोमवार को रूसी कंपनियों को अपना विदेशी करेंसी में कमाई का 80 फीसदी हिस्सा बेचना का आदेश दिया है और रूसी नागरिकों रूसी सिक्योरिटीज़ के बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

साथ ही आपको बता दें कि आर्थिक प्रतिबंधों के बीच रूस ने अपने नागरिकों के लिए दस हज़ार डॉलर से ज़्यादा राशी के साथ देश नहीं छोड़ने का भी आदेश जारी किया है। 

इससे समझा जा सकता है कि प्रतिबंधों का सीधा असर रूसी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है जिसकी कीमत रूसी नागरिकों को महंगाई के तौर पर चुकानी पड़ सकती है।

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