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इज़रायल में गहाराया राजनीतिक संकट, संसद भंग, दो साल में चौथी बार होंगे चुनाव

by Ankush Choubey 4 months ago Views 9829

इजरायल की संसद नेसेट का चुनाव अनुपातिक मतदान प्रणाली के अंतर्गत होता है। जिसमें मतदाता को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को मतदान करना होता है।

Political crisis in Israel, dissolution of parliam
इजरायल में राजनीतिक संकट गहरा गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार मंगलवार को अंतिम समय सीमा के अंदर बजट पारित करने में विफल रही जिसके बाद संसद को भंग कर दिया गया है।  इस तरह से इजरायल महज दो सालों में चौथे आम चुनाव के मुहाने पर है। गठबंधन सरकार के सहयोगी और रक्षामंत्री बेनी गेंट्ज ने नेतन्याहू पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि अब बेहतर यही होगा कि देश में नए चुनाव कराए जायें। दिसंबर की शुरुआत में  विपक्ष द्वारा 120 सदस्यीय सदन में संसद भंग करने का प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसके पक्ष में 61 और विरोध में 54 वोट पड़े थे।

बेंजामिन नेतन्याहू लिकुड पार्टी के अध्यक्ष हैं, जबकि रक्षा मंत्री बेनी गेंट्ज ब्लू एंड व्हाइट पार्टी से जुड़े हैं।  अप्रैल में दोनों दलों ने एक साझा समझौते के तहत सरकार बनाई थी। हालांकि, जल्द ही दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आने लगे। प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू सरकार को समर्थन दे रही बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने सरकार भंग करने के समर्थन मतदान किया था। बेनी गैंट्ज़ ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर अपने हितों को देश से ऊपर रखने का आरोप लगाया है लेकिन प्रधानमंत्री ने इन आरोपों को गलत बताया है।  


दोनों के बीच ताजा विवाद बजट को लेकर है। बेनी गेंट्ज ने मांग की थी कि 2020 और 2021 दोनों को कवर करते हुए एक बजट पारित किया जाये, ताकि स्थिरता बनी रह सके।  लेकिन पीएम बेंजामिन नेतन्याहू इसके लिए तैयार नहीं हुए। पीएम नेतन्याहू समर्थकों का कहना है कि गेंट्स का यह प्रस्ताव केवल सरकार को अस्थिर करने की साजिश है। वो नेतन्याहू को हटाकर खुद प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं।

इजरायल की संसद नेसेट का चुनाव अनुपातिक मतदान प्रणाली के अंतर्गत होता है। जिसमें मतदाता को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को मतदान करना होता है। किसी भी पार्टी को संसद में पहुंचने के लिए कुल मतदान में से कम से कम 3.25 फीसदी वोट पाना जरूरी है। यदि किसी पार्टी का वोट प्रतिशत 3.25 से कम होता है तो उसे संसद की कोई भी सीट नहीं मिलती है। पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के अनुपात में उन्हें संसद की सीटें आवंटित कर दी जाती हैं।

यह प्रक्रिया 28 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाती है। इजरायल के इतिहास में कोई भी पार्टी आज तक पूर्ण बहुमत से सरकार नहीं बना पाई है।संसद भंग होने पर इजरायली कानून के मुताबिक मार्च तक एक बार फिर आम चुनाव कराना अनिवार्य होगा। ऐसे में बीते दो सालों में यह चौथी बार होगा जब इजरायल में आम चुनाव होंगे। इससे पहले तीसरी बार हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। जिसके बाद पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में लिकुड पार्टी और ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने मिलकर सरकार बनाई थी।

नेतन्याहू का कहना है कि ब्लू और व्हाइट पार्टी समझौतों से हट गयी और देश को कोरोना संकट के दौरान अनावश्यक रूप से चुनावों में घसीटा गया। उन्होंने कहा कि वे चुनाव नहीं चाहते और उनकी पार्टी ने इसके खिलाफ मतदान किया है लेकिन वे हम चुनाव से डरते नहीं हैं, क्योंकि वे जीतेंगे।

इस दावे के बावजूद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू  के लिए यह एक मुश्किल की घड़ी है।  उन पर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप हैं और काफी समय से उनके खिलाफ प्रदर्शन भी हो रहे हैं।  ऐसे में यदि चुनाव होते हैं तो नेतन्याहू के लिए फिर से सत्ता में आना मुश्किल हो जाएगा।

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