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ओली और प्रचंड में नेकपा पर कब्जे की लड़ाई पहुँची आयोग, संसद भंग करने का मामला संविधान पीठ में

by GoNews Desk 3 months ago Views 10789

प्रचंड नेपाल धड़े ने संसद भंग करने के प्रधानमंत्री ओली के फ़ैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और तानाशाही बताया है।

Oli and Prachanda Commission fight to capture NCP,
नेपाल में संसद भंग किये जाने के बाद पीएम के.पी.शर्मा ओली और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीच नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी पर कब्जे की लड़ाई तेज़ हो गयी है और मामला चुनाव आयोग पहुँच गया है। प्रचंड-नेपाल धड़े ने ओली को हटाकर प्रचंड को पार्टी संसदीय दल का नेता चुन लिया है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल को ओली की जगह प्रचंड के साथ पार्टी का सह अध्यक्ष भी चुन लिया गया है।

इस बीच नेपाल की संसद भंग करने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने एक संविधान पीठ का गठन कर दिया है जो शुक्रवार को सुनवाई करेगा। याचिकाओं में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ओली को संसद भंग करने की सिफारिश करने का अधिकार नहीं था। संसद भंग करने का फ़ैसला असंवैधानिक है।


म्पुष्प कमल दहन ‘प्रचंड’ ने आज नेपाल के चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली को पार्टी के चेयरमैन पद से हटाने और उनकी जगह माधव कुमार नेपाल को सह अध्यक्ष बनाये जाने की जानकारी दी। प्रचंड के पत्र के मुताबिक पार्टी की सेंट्रल कमेटी की बैठक में कल यह फ़ैसला लिया गया। इससे पहले ओली धड़े ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपने धड़े के असली पार्टी होने का दावा किया था। तर्क यह दिया था पार्टी के चेयरमैन ओली की सहमति के बिना सेंट्रल कमेटी की बैठक बुलायी गयी थी।

प्रचंड नेपाल धड़े ने संसद भंग करने के प्रधानमंत्री ओली के फ़ैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और तानाशाही बताया है। इसके साथ संसद का सत्र तुरंत बुलाने की माँग भी की गयी है।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के 275 सदस्यी प्रतिनिधि सभा में 173 सदस्य हैं। 17 मई 2018 को के.पी.शर्मा ओली के नेतृत्व वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और प्रचंड के नेतृत्व वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) का विलय हुआ था और नयी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) का गठन हुआ था। इस घटना ने कम्युनिस्टों को देश की एक बड़ी राजनीतिक ताक़त के रूप में स्थापित कर दिया था। लेकिन तीन साल के अंदर ही यह एकता टूट गयी।

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