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न्यूज़ीलैंड: क्राइस्टचर्च हमले के दोषी को उम्रक़ैद, कभी नहीं मिलेगी परोल

by Shahnawaz Malik 8 months ago Views 13025

New Zealand: Life imprisonment for Christchurch at
पिछले साल न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की दो मस्जिदों में मास शूटिंग करके 51 लोगों की जान लेने वाले ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ब्रेंटन टैरंट को उम्र क़ैद की सज़ा सुना दी गई है. क्राइस्टचर्च हाईकोर्ट के जज कैमरन मैंडर ने इस मामले को इंसानियत के ख़िलाफ़ क़रार देते हुए यह भी साफ़ किया कि दोषी ब्रेंटन कभी पेरोल पर बाहर नहीं आ सकेगा.

ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ब्रैंटन ने 15 मार्च 2019 को क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों पर हमला करके 51 लोगों की हत्या कर दी थी. उसने इस मास शूटिंग की लाइव स्ट्रीमिंग फेसबुक पर करके दुनिया को दिखाया था कि वो नफ़रत में किस हद तक डूबा हुआ था.


दो मस्जिदों पर हमला करके ब्रैंटन तीसरी मस्जिद में दाख़िल होना चाहता था लेकिन सुरक्षा एजेंसियों से उसे ज़िंदा पकड़ लिया. मारे गए 51 लोगों में तीन साल का एक बच्चा भी शामिल था.

दुनिया को हिला देने वाले दहशतग़र्दी के इस वाक़ये से न्यूज़ीलैंड सन्न रह गया था. प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात करके एकजुटता ज़ाहिर की थी. उन्होंने इस वारदात को न्यूज़ीलैंड पर हमला माना था और आरोपी का नाम अपने मुंह से लेने से इनकार कर दिया था.

फ़ैसले के बाद जेसिंडा अर्डर्न ने कहा कि इस हमले की वजह से उपजा दर्द ख़त्म नहीं हो सकता. उम्मीद करती हूं कि आज के बाद उस आतंकवादी का नाम लेने या सुनने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. वह इसी लायक़ है कि अपनी उम्र जेल की सलाखों के पीछे चुपचाप काटे.

क्राइस्टचर्च हाईकोर्ट के जज कैमरन मैंडर ने फैसला सुनाते वक़्त मारे गए और ज़ख़्मी हुए सभी लोगों के नाम पढ़कर सुनाए. उन्होंने ब्रैंटन से कहा कि उसने इतने लोगों की ज़िंदगियां तबाह कर दीं और उसने ज़रा भी दया नहीं दिखाई. यह बेहद क्रूर था और संवेदना से पहे था.

जज कैमरन ने यह भी कहा कि वो जितना समझ पाए हैं, उसमें पीड़ितों के साथ किए गए अपराध पर कोई पछतावा नहीं है. दोषी ने ख़ुद को समाज से कटा हुआ पाया तो बदला लेने के इरादे से समाज को ही नुकसान पहुंचाया. सज़ा सुनाने के बाद जज ने ब्रैंटन से पूछा कि क्या वो कुछ कहना चाहता है लेकिन चुपचाप खड़े दोषी ने जवाब दिया- नहीं, शुक्रिया.

चार दिनों तक चली सुनवाई के दौरान 91 पीड़ितों ने बताया कि ब्रैंटन ने मुस्लिम समाज के साथ जो किया, उसकी वजह से उन्हें कितनी तकलीफ़ों से गुज़रना पड़ा है. इस दौरान ब्रैंटन चुपचाप बैठा रहा. उसके चेहरे पर किसी तरह के भाव नहीं उभरे.

न्यूज़ीलैंड में हत्या के मामले में फांसी की सज़ा नहीं होती और हत्या के लिए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई जाती है. साल 1961 में फांसी की सज़ा को ख़त्म कर दिया गया था. सज़ा सुनाने के दौरान जज यह भी बताते हैं कि जेल में कितने साल की सज़ा काटने के बाद दोषी परोल का हक़दार होगा. मगर इस मामले में जज कैमरन ने कहा कि दोषी ब्रैंटन को परोल का हक़ एक भी बार नहीं होगा. उसे पूरी ज़िंदगी जेल की सलाखों के पीछे गुज़ारनी होगी.

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