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नेपाल के पीएम को एनसीपी से 'निकाला' गया, पार्टी पर क़ब्जे के लिए प्रचंड गुट से खींचतान बढ़ी

by M. Nuruddin 2 months ago Views 14046

ओली के संसद भंग करने के फैसले की पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड और माधव कुमार नेपाल ने कड़ी आलोचना की थी और उनके फैसले को असंवैधानिक बताया था।

Nepal's PM Expelled from NCP, Struggle increased f
सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में  प्रतिद्वंद्वी प्रचंड गुट ने रविवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी से निकाल दिया। ओली पर यह कार्रवाई संसद के निचले सदन को भंग करने के उनके फैसले की आलोचना करते हुए की गई है। पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड की अगुवाई वाले प्रतिद्वंद्वी गुट के प्रवक्ता नारायणजी श्रेष्ठ ने बताया कि पीएम ओली अब पार्टी के सदस्य नहीं हैं।

नारायणजी श्रेष्ठ ने बताया, ‘पेरिस डांडा में आयोजित सेंट्रल कमेटी की बैठक में के.पी शर्मा ओली को पार्टी से निकालने का फैसला लिया गया। उनके पास अब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की साधारण सदस्यता भी नहीं है।’ ओली के संसद भंग करने के फैसले की पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड और माधव कुमार नेपाल ने कड़ी आलोचना की थी और उनके फैसले को असंवैधानिक बताया था।


प्रचंड ने पीएम ओली को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि उनके असंवैधानिक फैसले के लिए उनपर कार्रवाई क्यों ना की जाए? हालांकि केपी ओली ने दहल की चिट्ठी का कोई जवाब नहीं दिया। दहल गुट के प्रवक्ता ने कहा कि इंतज़ार करने के बाद भी जब ओली की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तब पार्टी की सेंट्रल कमेटी द्वारा यह कार्रवाई की गई।

दरअसल, प्रधानमंत्री ओली के संसद भंग करने के फैसला का शुरु से विरोध हो रहा है। पूर्व पीएम  प्रचंड और माधव कुमार नेपाल इसके खिलाफ़ सड़क पर भी उतरे। काठमांडू में एक सभा को संबोधित करते हुए पार्टी नेताओं ने ओली के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी की सदस्यता रद्द करने की चेतावनी भी दी थी।

ओली पर आरोप है कि उन्होंने अपने फायदे के लिए पार्टी नेताओं से बिना किसी सलाह-मशविरा किये 20 दिसंबर को संसद भंग करने का निर्णय लिया था। इसके बाद उन्होंने अप्रैल-मई में मध्यावधि चुनाव का ऐलान भी कर दिया था। राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने ओली की मध्यावधि चुनाव की मांग को मंज़ूरी दे दी थी।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी किसकी ?

इसके बाद 22 दिसंबर को प्रचंड दहल और माधव कुमार ने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में अपना रास्ता अलग कर लिया था। ओली और दहल दोनों ही ने पार्टी पर अपना दावा किया है जिसे नेपाल के चुनाव आयोग ने ख़ारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि दोनों ही गुट पॉलिटिकल पार्टीज़ एक्ट-2017 और पार्टी क़ानून का पालन करने में विफल रहे।

क़ानून में नियम है कि ऐसी स्थिति में पार्टी की बागडोर उन्हें दी जाएगी जिनके पास पार्टी के सेंट्रल कमेटी के 40 फीसदी सदस्यों की मंज़ूरी होगी। आयोग के मुताबिक़ दोनों ही गुटों के दावे इस नियम का पालन नहीं करते। मौजूदा विवाद से पहले नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी में 445 सदस्य थे।

नेपाली मीडिया काठमांडू पोस्ट के मुताबिक़ विवाद शुरु होने के बाद ओली ने पार्टी की सेंट्रल कमेटी का विस्तार कर दिया और सदस्यों की संख्या 1,199 तक बढ़ा दी गई। इनमें तभी 556 सदस्य को जोड़ा गया था और 197 और नए सदस्यों को जोड़ने का प्रावधान किया था।

हालांकी ओली गुट ने चुनाव आयोग के सामने सेंट्रल कमेटी में 1,501 सदस्य होने की बात कही थी। उधर दहल गुट ने दावा किया कि उन्हें 445 सेंट्रल कमेटी के सदस्यों में दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन हासिल है। ज़ाहिर है कि ओली के इस नए खेल से दहल की परेशानी बढ़ गई है।

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