ads

संसद भंग किये जाने के ख़िलाफ़ नेपाली कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन

by GoNews Desk 3 months ago Views 16729

नेपाल में लोकतंत्र बहाली में अहम भूमिका निभाने वाली नेपाली कांग्रेस पिछले कुछ चुनावों में कम्युनिस्टों से पिछड़ रही थी, उसके लिए अपनी खोई प्रतिष्ठा पाने का यह सुनहरा मौका है।

Nationwide protest of Nepali Congress against diss
नेपाल में राजनीतिक संकट गहाराता जा रहा है। देश की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने आज प्रतिनिधि सभा (नेपाली संसद) भंग किये जाने के प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली के फ़ैसले के ख़िलाफ़ देश भर में प्रदर्शन किया। हालाँकि पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा ने भक्तपुर में एक प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का पूरा सम्मान करेगी। इस मामले में अदालत पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जायेगा। न्यायपालिका को अधिकार है कि वह अपने विवेक का इस्तेमाल करके फ़ैसला करे।

दरअसल, 20 दिसंबर को पीएम ओली ने बहुतम होने के बावजूद अपनी ही संसद भंग करके मध्यावधि चुनाव कराने की सिफारिश की थी जिसे राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने स्वीकार कर लिया। इसी के साथ अगले साल 30 अप्रैल और 10 मई को चुनाव की घोषणा भी हो गयी। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 12 याचिकायेँ दायर की गयी हैं जिनमें माँग की गयी है कि संसद भंग करने के फ़ैसले को असंवैधानिक घोषित किया जाये। प्रधानमंत्री को ऐसा कोई अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का गठन किया है।


नेपाल में लोकतंत्र बहाली में अहम भूमिका निभाने वाली नेपाली कांग्रेस पिछले कुछ चुनावों में कम्युनिस्टों से पिछड़ रही थी, उसके लिए अपनी खोई प्रतिष्ठा पाने का यह सुनहरा मौका है। ओली की संसद भंग करने की सिफारिश के पीछे कभी माओवादी पार्टी के चेयरमैन बतौर गुरिल्ला युद्ध छेड़ने वाले पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' के साथ ओली की प्रतिद्वंद्विता बतायी जाती है।

ओली की नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और प्रचंड की पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) का पिछले चुनाव के बाद विलय हो गया था जिसके बाद नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी का गठन हुआ था। इस पार्टी के पास संसद में दो तिहाई बहुमत था। इस पार्टी का अध्यक्ष ओली को और सह अध्यक्ष प्रचंड को बनाया गया था लेकिन 'दो केंद्रों' वाली व्यवस्था बहुत दिन चल नहीं सकी और सरकार और प्रचंड समर्थकों के बीच तनाव बढ़ता गया जिसका नतीजा संसद भंग करने की सिफारिश के रूप में सामने आया।

नेपाली कांग्रेस के सामने अवसर है कि वह कम्युनिस्टों पर लोकतांत्रिक आधार पर काम करने के मामले में अपरिवपक्व बताये। हिमालयन टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक काठमांडू में आयोजित शांति बैठक में नेपाली कांग्रेस के नेता प्रकाश मान सिंह ने कहा कि ओली सरकार ने संविदान की मूल भावना पर आघात किया है।

नेपाली कांग्रेस ने संविधान सभा के ज़रिये इस संविधान को बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी और वह महज़ दर्शक के रूप में इस परिघटना को देखते नहीं रह सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि ओली ने निजी महात्वाकांक्षा और प्रतिद्वंद्वियों से निपटने के लिए संसद भंग करायी है।

ताज़ा वीडियो