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फ्रांस की कैबिनेट ने पास किया ‘मुस्लिमों को अतिवादियों’ से बचाने से जुड़ा बिल

by GoNews Desk 5 months ago Views 7553

बिल के ड्राफ्ट में कहा गया है कि मुसलमान संगठनों को लेकर आर्थिक पारदर्शिता बरतने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे।

France's cabinet passed a bill to protect 'Muslims
फ्रांस की कैबिनेट ने गुरुवार को एक बिल पास किया है जिसमें होम स्कूलिंग और हेट स्पीच पर लगाम लगाने की बात कही गई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लंबे समय से धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का बचाव करने का दावा कर रहे हैं। हालांकि उनके आलोचकों का कहना है कि इसकी आड़ में धर्मों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

फ्रांस के प्रधानमंत्री जीन कैस्टेक्स ने मुसलमानों को अतिवादियों से ‘सुरक्षित’ रखने के लिए इसे ‘संरक्षण देने वाला क़ानून’ बताया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘ये क़ानून किसी भी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं है।’ क़ानून में दूसरे इंसान की व्यक्तिगत जानकारियों को ग़लत भावना के साथ इंटरनेट पर उजागर करने पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।


इस क़ानून को अक्टूबर में एक शिक्षक सैमुअल पैटी की हत्या की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। शिक्षक की एक छात्र ने कथित रूप से पैग़ंबर मुहम्मद के कार्टून दिखाने के बाद हत्या कर दी थी। इस क़ानून के मुताबिक़ इस्लामी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए 'चोरी-छिपे चलने वाले स्कूलों' पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। होम स्कूलिंग के नियमों को कठोर करने की बात भी कही गई है।

बिल के ड्राफ्ट में कहा गया है कि मुसलमान संगठनों को लेकर आर्थिक पारदर्शिता बरतने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे। धार्मिक पोशाक पहनने को लेकर भी नियम कड़े किए गए हैं और प्रतिबंध का दायरा बढ़ाया गया है। यह नियम ट्रांसपोर्ट वर्कर्स और मार्केट में काम करने वाले स्टाफ़ों पर भी लागू किया जाएगा।

इस बिल में बहुविवाह को कठोरता से लिया गया है। इसके तहत बहुविवाह पर लगे प्रतिबंध को और कठोर किया जाएगा। बहुविवाह करने वालों को घर की सुविघा नहीं दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि इस प्रस्तावित क़ानून की आलोचना भी हो रही है। इन दिनों तुर्की और फ्रांस लगातार आमने-सामने है। अब तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इस क़ानून को ‘सीधे तौर पर उकसाने’ वाला बताया है। उन्होंने मैक्रों को ‘मानसिक रूप से बीमार’ तक बता दिया। इनके अलावा इमैनुएल मैक्रों का पाकिस्तान, बांग्लादेश, मलेशिया और लेबनान जैसे देशों ने विरोध किया है।

धार्मिक स्वतंत्रता मामले में अमेरिकी दूत सैम ब्राउनबैक ने इसकी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह से कड़ाई से निपटने की कोशिश की गई तो हालात बिगड़ने का ख़तरा है। ख़ुद फ्रांस के कई वामपंथी नेताओं ने मैक्रों के इस क़दम की आलोचना की है। फ्रांसीसी नेताओं का कहना है कि इससे मुसलमानों के लिए ख़तरा पैदा होगा।

हालांकि क़ानून को लाए जाने पर लंबे समय से विचार चल रहा था लेकिन हाल ही में हुए एक के बाद एक हमले से इस एजेंडे को प्राथमिकता मिली है। सैमुअल पैटी की हत्या और उसके बाद हुए हमले से फ्रांस में आक्रोश पैदा हुआ। हाल ही में हुए हमलों को साल 2015 में एक व्यंग पत्रिका शार्ली हेब्दो पर हुए चरमपंथी हमले से जोड़ कर देखा जा रहा है जिसमें 17 लोग मारे गए थे।

 

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