ads

म्यामाँर में दमन के बीच लोकतंत्र बहाली आंदोलन तेज़, चुनाव आयोग के 20 अधिकारी भी हिरासत में

by M. Nuruddin 1 month ago Views 10635

म्यांमार के इस तख़्तापलट का दुनियाभर में विरोध हो रहा है। युनाइटेड नेशन ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें स्टेट काउंसिलर आंग सांग सू की की रिहाई की मांग की गई है

Democracy restoration movement picks up in Myanmar
लोकतांत्रिक सरकार को बरख़ास्त करके देश की बागडोर अपने हाथ में ले लेने वाली सेना के ख़िलाफ़ म्याँमार में प्रदर्शनों की बाढ़ आयी हुई है। लोग लोकतंत्र को बहाल करने की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उधर, सेना और पुलिस के ज़रिये प्रदर्शनकारियों का दमन भी तेज़ हो गया है। लाठीचार्ज के साथ-साथ पैलेट गन, वॉटर कैनन और कभी-कभी तो गोलियाँ भी चला रही हैं। एम्नेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ सुरक्षा बलों को मशीन गन के साथ तैनात किया गया है। सुरक्षा लों की गोली से एक महिला प्रदर्शनकारी के मारे जाने की ख़बर है। 

सेना ने 1 फरवरी को म्यांमार की स्टेट काउंसिलर आंग सांग सू की को हिरासत में लेकर सत्ता का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया था। प्रदर्शनकारी आंग सांग सू की की रिहाई और लोकतंत्र बहाल करने की मांग कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ सरकारी अधिकारी समेत सोशल एक्टिविस्ट और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही है। रिपोर्ट के मुताबिक़ अब तक करीब 400 लोगों को हिरासत में लिया गया है।


म्यांमार के इस तख़्तापलट का दुनियाभर में विरोध हो रहा है। युनाइटेड नेशन ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें स्टेट काउंसिलर आंग सांग सू की की रिहाई की मांग की गई है। हाँलाकि यह संशोधित प्रस्ताव है। मूल प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों को जांच के लिए म्यांमार भेजे जाने की बात भी कही गई थी जिसे रूस और चीन के विरोध के बाद हटा गया है। पहले चीन और रूस ने सेना की कार्रवाई को म्यांमार का आंतरिक मामला बताते हुए प्रस्ताव का विरोध किया था।

भारत ने यूएन ह्यमन राइट कमीशन में इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। यूएनएचआरसी में भारत ने कहा है कि म्यांमार में हालिया घटनाक्रम गहरी चिंता का विषय है। इससे म्यांमार में लोकतंत्र प्रभावित हुआ है। यूएनएचआरसी में भारत की  स्थायी प्रतिनिधि इंदिरा मणि पांडेय ने कहा है कि म्यांमार के लोगों की आशा और आकांक्षाएँ नए घटनाक्रम से आहत हुई हैं। क़ानून का शासन हमेशा बरक़रार रहना चाहिए और हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक विरोध का अधिकार, लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। 

ग़ौरतलब है कि 8 नवंबर 2020 को म्यांमार में स्टेट काउंसिलर का चुनाव हुआ था। इस चुनाव में आंग सांग सू की की पार्टी नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी (एनएलडी) को 80 फीसदी वोट मिले थे। सेना का आरोप है कि इस चुनाव में धांधली हुई और इसकी जांच होनी चाहिए। तख़्तापलट से पहले सेना ने वोटर लिस्ट के तहत आठ मिलियन वोटों की धांधली का दावा किया था। सेना का आरोप है कि ‘लोकतांत्रिक आम चुनाव के दौरान मतदाता सूची में धोखाधड़ी हुई और आंग सांग सू की की सरकार इसकी जांच नहीं कर रही थीं।

हालांकि म्यांमार के चुनाव आयोग ने सेना के इन आरोपों को ख़ारिज किया था। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक़ चुनाव में धांधली की बात को साबित करने के लिए सेना अब रात के अंधेरे में चुनाव आयोग के अधिकारियों को गिरफ्तार कर रही है।

एसिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिज़नर्स (AAPP) ने एक लिस्ट जारी कर बताया है कि अबतक चुनाव आयोग के 20 अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। सोशल मीडिया पर इसके ख़िलाफ मुहिम जारी है और लोग नारे लगा रहे हैं, ‘They Shoot In Day, They Steal At Night, Let There Be Light, Let There Be Democracy.’

ताज़ा वीडियो