कोरोना से दुनियाभर में 33.2 करोड़ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ख़तरा: UNICEF

by M. Nuruddin 8 months ago Views 46893

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ कोविड महामारी से दुनियाभर के 93 फीसदी देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई, जबकि अब मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की मांग बढ़ रही है।

Epidemic threatens mental health of 332 million ch
कोरोना महामारी और उसकी वजह से हुए लॉकडाउन से तरह-तरह की समस्याएं पैदा हुई है। बच्चों के लिए काम करने वाली युनाइटेड नेशन की संस्था यूनिसेफ ने अपनी एक रिपोर्ट में लॉकडाउन में रहने की वजह से बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन से हर सात में एक बच्चा और दुनियाभर में करीब 332 मिलियन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरे पैदा हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनियाभर में 139 मिलियन बच्चे लगातार कम से कम नौ महीने तक अपने घर में बंद रहे। इनके अलावा 193 मिलियन बच्चों को आंशिक तौर पर लॉकडाउन में रहना पड़ा। यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर ने कहा, ‘देशव्यापी तालाबंदी और महामारी से संबंधित प्रतिबंधों के साथ, हम सभी के लिए यह एक लंबा साल रहा लेकिन ख़ासतौर पर बच्चों के लिए। इसमें भी घर में अगर आप किसी एब्यूज़र के साथ फंसे हों तो इसका प्रभाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।’


रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में, अनुमानित 50 मिलियन बच्चे महामारी से पहले भी मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से पीड़ित थे। जैसे-जैसे महामारी फैली, इसका प्रकोप न सिर्फ आर्थिक स्थिति पर बल्कि भारत में बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ा।

स्कूल बंद होने से बच्चों का कुछ नया सीखना बंद हो जाता है, अपने साथियों के साथ उनकी बातचीत सीमित हो जाती है। महामारी ने माता-पिता और देखभाल करने वालों पर भी नए तनाव पैदा किए, जिससे उनके बच्चों की देखभाल और उनकी देखभाल करने की क्षमता के लिए भी चुनौती पैदा हुई।

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक कहा, ‘कई बच्चे अपने भविष्य के लिए डरे हुए हैं, अकेला महसूस कर रहे हैं, चिंतित हैं और चिंता महसूस कर रहे हैं। हमें इस महामारी से बच्चे और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक बेहतर दृष्टिकोण के साथ उभरना चाहिए और हमें इसकी शुरुआत करनी चाहिए।’

कोरोना महामारी की वजह से बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण पर असर पड़ रहा है।’ यूनिसेफ ने इसके लिए 8000 लोगों का सर्वे किया जिसमें यह सामने आया कि एक चौथाई से ज़्यादा युवाओं ने लॉकडाउन के दौरान चिंताओं का अनुभव किया और 15 फीसदी डिप्रेशन में चले गए।

हालांकि महामारी से पहले भी बच्चों और युवाओं में इस तरह की समस्याएं थी। आंकड़े बताते हैं कि महामारी से पहले 15 साल से कम उम्र के ऐसे 75 फीसदी बच्चों में चिंता और डिप्रेशन की समस्याएं थी जो महामारी के बाद बढ़ गए।

रिपोर्ट के मुताबिक़ हर साल आत्महत्या करने वाले आठ लाख लोगों में ज़्यादातर युवा ही होते हैं और 15 साल के बच्चों में आत्महत्या, मौत का तीसरा प्रमुख कारण बन चुका है। एक वैश्विक अनुमान यह भी है कि हर चार में एक बच्चे ऐसे माता-पिता के साथ रहते हैं जो किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ कोविड महामारी से दुनियाभर के 93 फीसदी देशों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई। जबकि अब मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की मांग बढ़ रही है। चीन के 194 शहरों के एक अध्ययन में पाया गया कि 16 फीसदी लोगों में महामारी के दौरान मध्यम से गंभीर डिप्रेशन के लक्षण और 28 फीसदी से ज़्यादा लोगों में मध्य से गंभीर चिंता के लक्षण पैदा हुए। 

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