साल 2019 में देशभर में सांप के काटने के 2 लाख 20 हज़ार मामले

by GoNews Desk 1 year ago Views 82433

2 lakh 20 thousand cases of snake bite across the
भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बेशक़ बन चुका है लेकिन अपने नागरिकों की जान की सुरक्षा के मोर्चे पर एक फिसड्डी देशों में आता है. संसद में पेश नए आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 में देशभर में सांप के काटने के 2 लाख 20 हज़ार मामले सामने आए और मेडिकल की सुविधा नहीं होने के चलते मौतें भी दर्ज हुईं.


संसद में पेश स्वास्थ्य मंत्रालय के नए आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल देशभर में सांप के काटने के मामलों में ज़बरदस्त उछाल आया है. साल 2018 में 1 लाख 64 हज़ार 31 लोगों को सांप ने काटा था जबकि साल 2019 में यह आंकड़ा 2 लाख 20 हज़ार को पार कर गया. साल 2018 में सांप के काटने की वजह से 885 लोगों की मौत हुई. इसी तरह 2017 में 1 लाख 58 हज़ार 650 लोगों को सांप ने काटा और मरने वालों की संख्या 1060 दर्ज की गई और 2016 में सांप के काटने के 1 लाख 78 हज़ार 433 मामलों में 1068 लोगों की जान गई।


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सबसे ज़्यादा 609 मौतें 2016 से 2018 के बीच पश्चिम बंगाल में हुईं. इसी अवधि में ओडिशा में 365, उत्तर प्रदेश में 319, मध्य प्रदेश में 249 और आंध्र प्रदेश में 230 लोगों की मौत हुई. राजधानी दिल्ली में भी 7 लोगों को सांप के काटने के बाद बचाया नहीं जा सका। इससे कम आंकड़ा जम्मू कश्मीर का है, जहां सिर्फ 2 लोगों की जान सांप के काटने की वजह से गयी.

हालांकि सरकारी आंकड़े से इतर American Society of Tropical Medicine and Hygiene की रिपोर्ट दूसरी कहानी बयां करती है. इसके मुताबिक दुनिया में सबसे ज्यादा लोग सांप के काटने से भारत में मरते है और दुनिया में हर साल इससे मरने वाले 1 लाख लोगों में से 46 हज़ार भारतीय होते हैं।

यह मौतें इसलिए होती हैं क्योंकि सांप के काटने के बाद लोगों को मेडिकल की सुविधा नहीं मिल पाती. बड़े पैमाने पर लोग इलाज की बजाय अघोरी और तांत्रिकों से झाड़फूंक करवाते हैं. भारत की तुलना अगर अमेरिका से करें तो यहां हर साल ज़हरीले सांप के काटने के तक़रीबन आठ हज़ार मामले आते हैं लेकिन मेडिकल सुविधा मिलने की वजह से एक भी मौत नहीं होती.

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