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हर साल कम हो रही है बारिश, 'भारत' जल संकट के मुहाने पर

by GoNews Desk 1 month ago Views 2165

Rain is decreasing every year, India at the mouth
देश में मौसम का मिजाज़ बदलता जा रहा है। बाढ़ प्रभावित कहे जाने वाले राज्यों में सूखा और सूखे वाले राज्यों में बाढ़ आ रही है। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश के तीन राज्यों में रेगिस्तान वाले राज्य राजस्थान से भी कम बरसात हो रही है, और सबसे ज्यादा बारिश अब पूर्वोत्तर के राज्यों में नहीं अरब सागर से लगे पश्चिमी तट पर होती है।

इकोसिस्टम फॉर एकाउंट्स इंडिया नाम की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जहाँ साल 2016 में राजस्थान में 574.4 मिलीमीटर बारिश हुई, वहीं तमिल नाडु में 534.6 मिलीमीटर, पंजाब में 444 मिलीमीटर और हरियाणा में केवल 392.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज़ हुई। इसमें अगर राजस्थान को छोड़ दे तो बाकी सभी तीनो राज्यों में 2015 से कम बारिश हुई। मसलन तमिल नाडु में 2015 में 1201.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी लेकिन 2016 में सिर्फ 534.6 मिलीमीटर।


इसी तरह 2016 में देश में सबसे ज्यादा बारिश गोवा में दर्ज हुई, जहा 3065.1 मिलीमीटर बारिश  हुई। इससे पहले यह ख़िताब मेघालय के पास था जहाँ 2015 में 3800 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई थी।

सबसे चिंताजनक बात यह है की पिछले 16 सालों में केवल 3 वर्ष को छोड़कर देश में बारिश सामान्य से कम हुई है। सबसे कम बारिश साल 2009 में हुई थी जब यह सामान्य  से 20 फीसदी कम थी। सिर्फ 2005, 2010 और 2013 में ही बारिश सामान्य से ज्यादा थी।

इस रिपोर्ट के मुताबिक बारिश से ही भूजल का स्तर बढ़ता है जिससे देश की 67 फीसदी पानी की ज़रूरत पूरी होती है। अगर देश में इसी तरह बारिश साल दर साल कम होती रही तो जल्दी ही भूजल ख़त्म हो जायेगा और पानी का संकट पैदा हो जायेगा।

वॉटर एड इंडिया की साल 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 60 करोड़ लोग जल संकट से जूझ रहे हैं। इसका मतलब है कि देश की तक़रीबन आधी आबादी के पास पीने और बाक़ी ज़रूरतों के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। पीने का साफ पानी नहीं मिलने से हर साल तकरीबन 2 लाख लोगों की बीमारियों की चपेट में आकर मौत हो जाती है। देश में पानी को लेकर हिंसा भी बढ़ रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 में 92 लोगों की ज़िंदगी पानी को लेकर हुए झगड़े की भेंट चढ़ गई।

जल शक्ति मंत्रालय की एक रिपोर्ट बताती है कि जिन शहरों में पानी की क़िल्लत सबसे ज़्यादा है, उनमें दिल्ली, मुंबई, नासिक, पुणे, ग्वॉलियर, इंदौर, मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, गुवाहाटी, वड़ोदरा, जयपुर, भुवनेश्वर, फरीदाबाद और अमृतसर, लुधियाना हैं शामिल हैं। इन शहरों में ग्राउंड वॉटर 4 मीटर तक नीचे चला गया है। देश के चार बड़े महानगरों में शामिल चेन्नई में 2019 की गर्मियों में पानी ख़त्म हो गया था।

देश के ग्रामीण इलाक़ों में हालात बिगड़ चुके हैं। इसी मंत्रालय के मुताबिक बीते दस सालों में लगभग 66 फ़ीसदी कुओं में पानी का स्तर 2 मीटर तक नीचे चला गया है। कह सकते है कि भारत ना केवल कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से , बल्कि भूख, बेरोज़गारी और पानी की कमी और कई सारे मोर्चो पर एक साथ लड़ रहा है।

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