दुनिया को एनर्जी के स्त्रोतों में तत्काल परिवर्तन की ज़रूरत : IEA

by GoNews Desk 9 months ago Views 1174

IEA Urges Large Scale Adoption Of Renewables In Re
इंटरनेश्नल एनर्जी ऑथोरिटी या अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा प्राधिकरण (आईईए) ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि दुनिया को ऊर्जा के स्रोतों में तत्काल परिवर्तन की ज़रूरत है।

वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2021 शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में IEA ने कहा: "दुनिया अपनी भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त निवेश नहीं कर रही है ... संक्रमण से ट्रांज़िशन संबंधित ख़र्च धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं, लेकिन ऊर्जा सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जो आवश्यक क़दम उठाए जाने चाहिए, उससे बहुत कम है।”


रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर जलवायु परिवर्तन और अस्थिर ऊर्जा बाज़ारों पर महत्वपूर्ण कार्रवाई हासिल करनी है तो ऊर्जा के स्रोतों में निवेश को दशक के अंत तक तीनगुना बढ़ाने होंगे।

वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक पेरिस स्थित एडवोकेसी और वॉचडॉग संगठन का वार्षिक प्रकाशन है जो इस साल की शुरुआत में ग्लासगो, यूके में आगामी COP26 शिखर सम्मेलन का मार्गदर्शन करने के लिए जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि शिखर सम्मेलन "2015 पेरिस समझौते के तहत नई और अधिक महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताओं को प्रस्तुत करने के लिए देशों की तत्परता का पहला परीक्षण" और "एक 'अचूक संकेत' प्रदान करने का अवसर है जो दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा के ट्राज़िशन को तेज़ करता है"।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के बाद ऊर्जा की मांग और निवेश में 'रिबाउंड' को सौर, पवन, जल विद्युत और बायोएनेर्जी जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ी हुई हिस्सेदारी द्वारा नियंत्रित करने की आवश्यकता है। 2021 में उत्सर्जन महामारी के पूर्व स्तर पर पहुंचने की आशंका है और ऐसे में एक नया रिकॉर्ड बन सकता है।

आईईए की रिपोर्ट इस तथ्य पर रौशनी डालती है कि ऊर्जा के स्रोत के रूप में कोयले के विस्तार को रोकना सभी परिदृश्यों की प्राथमिक विशेषता है जिससे "जलवायु लक्ष्य पूरे हो सकते हैं“। रिपोर्ट बताती है कि बिजली उत्पादन क्षेत्र में कोयले का इस्तेमाल प्रमुख है, ऐक ऐसा क्षेत्र जहां रेन्युएबल एनर्जी यानि नवीकरणीय ऊर्जा अधिकांश बाज़ारों में सबसे ज़्यादा लागत प्रभावी हैं।”

2030 तक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तीन बिंदुओं की चर्चा की गई है : STEPS, APS और NZE, जिसमें संबंधित "ऊर्जा प्रणाली में कोयले का बेरोकटोक इस्तेमाल” क्रमश: 5 फीसदी, 10 फीसदी और 55 फीसदी है।

बिजली उत्पादन में कोयले के योगदान को प्रबंधित करने और अंततः कम करने के दो तरीके हैं।

पहला और अधिक बेहतर- नए प्लांट्स के निर्माण को रोकना और दूसरा मौजूदा प्लांट्स से उत्सर्जन का प्रबंधन करना। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी जी-7 देशों ने कोयले से चलने वाली बिजली प्लांट्स के लिए समर्थन को ख़त्म करने का निर्णय लिया है, जिनमें हाल ही में चीन द्वारा अंतराष्ट्रीय स्तर पर कोयला संचालित पॉवर प्लांट के निर्माण और फंडिंग पर रोक लगाना शामिल है।

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