नवंबर में सबसे ‘ज़हरीली’ होती है दिल्ली की हवा

by Sarfaroshi 8 months ago Views 2297

Delhi's air is most 'poisonous' in November

राजधानी दिल्ली में  1-15 नवंबर के पखवाड़े में हवा सबसे ज़्यादा प्रदूषित या फिर यू कहें कि ज़हरीली होती है। दिल्ली सरकार का पिछले पांच सालों में PM2.5 कणों का किया विश्लेषण बताता है कि 1-15 नवंबर के बीच दिल्ली में पीएम2.5 कणों का औसतन स्तर 285 एमजीसीएम को छू जाता है, जिसका मतलब यह हुआ कि इस अवधि में राजधानी की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में आ जाती है। 

क्या होते हैं PM2.5 कण?
जानकारों के मुताबिक पीएम-10 और पीएम2.5 प्रदूषण फैलाने में अहम भूमिका निभाते हैं। पीएम 2.5 हवा में घुल जाने वाले छोटे कण होते हैं। इनकी चौड़ाई 2.5 माइक्रोमीटर होती है यानि कि आपके एक बाल की चौड़ाई का 40वां हिस्सा। यह कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें देख पाना नामुमकिन है औऱ यह कण सांस लेने के साथ फेंफड़ों में प्रवेश लेते हैं।

हवा में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ने से ही धुंध बढ़ती है जबकि विजिबिलटी कम हो जाती है। जानकारों के मुताबिक पीएम 2.5 का स्तर 60 एमजीसीएम तक होना चाहिए, उसके बाद यह नुकसान देने लगता है जबकि दिल्ली में पिछले 5 सालों में अक्टूबर से लेकर फरवरी के महीने तक कभी भी पीएम 2.5 स्तर 60 MGCM नहीं रहा। इससे पता चलता है कि दिल्ली के लोग कैसे लगभग ज़हरीली हवा में सांस ले रहे हैं। 

पराली और आतिबाज़ी प्रदूषणकी वजह! 
यह विश्लेषण दिल्ली में अक्टूबर से फरवरी के बीच शीत प्रदूषण के बदलते स्तर पर आधारित था। इसके अलावा प्रदूषण के कारकों पर भी ध्यान दिया गया ताकि सरकार इससे निपटने के लिए कदम उठा सके। अधकारियों की माने तो दिल्ली की हवा को खतरनाक बनाने में काफी हद तक पराली जलाना और दिवाली के दौरान जलाए गए पटाखों का योगदान होता है।

विश्लेषण बताता है कि सर्दी का सत्र मानसून के बाद अक्टूबर से शुरू होता है इस दौरान दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 80 ug/m3 होता है जो ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के विनियमों के तहत ‘मध्यम से खराब’ की श्रेणी में आता है। 

इसके बाद जब पराली जलनी शुरू होती है तो यह स्तर अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में बढ़कर 158 हो जाता है यानि कि ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में। इसके बाद नवंबर के शुरूआती दो हफ्तों में प्रदूषण अपने चरम पर होता है और फिर घटते-बढ़ते हुए फरवरी के आखिरी दो हफ्तों में पीएम 2.5 का लेवल 119 ug/m3 हो जाता है। 

दिवाली के दौरान जलाए गए पटाखे भी नवंबर में पीएम 2.5 का लेवल बढ़ाने में अहम योगदान देते हैं। जबकि वैज्ञानिकों के मुताबिक दिसंबर में प्रदूषण दिल्ली में स्थानीय कारणों जैसे खुले में कचरा जलाने और वाहनों के उत्सर्जन आदि से होता है जबकि शादी और नए साल के जश्न के दौरान आतिशबाज़ी भी इसकी एक वजह है।

अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच सालों से दिवाली का त्योहार या तो अक्टूबर के अंत में या फिर नवंबर के पहले हफ्ते में मनाया जा रहा है औऱ पाबंदी के बाद भी लोग नियमों का उल्लंघन करते हुए गाज़ियाबाद और गुरूग्राम जैसी जगहों से पटाखे ला कर जलाते हैं। उनका मानना है कि इस साल भी नवंबर के दौरान प्रदूषण सबसे अधिक हो सकता है क्योंकि दिवाली का त्योहार महीने के पहले हफ्ते में आएगा।   

क्या कर रही सरकार ?
राजधानी में सर्दी के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार ने 10 प्वाइंट विंटर एक्शन प्लान लान्च किया है। बीते दिनों सीएम ने कहा था कि इसके तहत धूल नियंत्रण, पूसा बायो-डीकंपोजर का उपयोग, स्मॉग टावरों को स्थापित करना, और अपशिष्ट जलने और वाहनों के उत्सर्जन की जाँच करना पर ध्यान दिया जाएगा।

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