दिल्लीवालों के पटाखे नहीं जलाने से सुधर रही है शहर की हवा : सफर

by Ankush Choubey 1 year ago Views 3249

City air quality is improving by not burning firec
देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत के कई राज्य प्रदूषण और कोरोना वायरस की दोहरी मार झेल रहे हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि दिल्ली समेत कई राज्यों में पटाखों पर लगे प्रतिबंध के चलते हवा की क्वालिटी सुधर रही है जिसका गुरुवार और शुक्रवार को साफ़ देखने को भी मिला।

दरअसल, बीते कई दिनों से दिल्ली समेत उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता बेहद ख़राब श्रेणी में थी लेकिन पटाखों पर प्रतिबंध लगने के बाद शुक्रवार को पहली बार दिल्ली के कई इलाकों में AQI 350 से कम दर्ज किया गया। दिवाली के त्यौहार के दौरान बीते कई सालों में यह पहला मौका है जब दिल्ली में AQI 350 के नीचे रहा है।


प्रदूषण की स्थिति सुधारने पर एयर क्वालिटी पर निगरानी रखने वाली केंद्र की एजेंसी सफर की तरफ से बड़ा बयान आया है। एजेंसी का कहना है कि अगर दिल्ली में दिवाली पर पटाखे नहीं फोड़े जाते हैं, तो पीएम 2.5 का स्तर बीते चार सालों में सबसे कम रहने की संभावना है। सफर इंडिया के मुताबिक, अगर बिल्कुल भी पटाखे नहीं फोड़े जाते हैं, तो पीएम 2.5 का स्तर चार सालों में सबसे कम रह सकता है, क्योंकि दिल्ली की सतही हवा में घुले ख़तरनाक पार्टिकल्स को हटाने में मदद करेंगी।

सफर इंडिया के मुताबिक पराली जलाए जाने का असर भी राजधानी के प्रदूषण पर पड़ सकता है। इसकी वजह से एक्यूआई ख़राब श्रेणी में जा सकती है। उन्होंने कहा कि 15 नवंबर को दिन की शुरुआत में अगर पटाखे जलाए जाते हैं तो पीएम 2.5 में बढ़त हो सकती है।

बीते 5 नवंबर को दिल्ली सरकार ने सभी तरह के पटाखों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का यह प्रतिबंध 7 से 30 नवंबर तक जारी रहेगा। वहीं, सोमवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने भी एनसीआर में सभी तरह के पटाखों पर 9 नवंबर की मध्यरात्री से 30 नवंबर की मध्यरात्री तक रोक लगा दी है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि बढ़ते प्रदुषण के चलते कोरोना के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में अगर दिल्ली में पटाखे नहीं जलाये जाते हैं तो इससे पीएम 2.5 का स्तर कम होने की उम्मीद है।

दरअसल, पीएम 2.5 एक ऐसा तत्व होता है, जो इंसानी बाल के डायमीटर का करीब तीन प्रतिशत होता है। डॉक्टरों का मानना है कि यह तत्व अगर शरीर में जाए तो फेफड़ों में बीमारी जैसी गंभीर परेशानी हो सकती है।

बता दें कि 0 से 50 के बीच एक्यूआई को अच्छा माना जाता है, 51 से 100 को संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 को बेहद खराब माना जाता है। जबकि, 401 से 500 को गंभीर श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन बीते 5 दिनों में दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई राज्यों में AQI निरंतर 500 के करीब पंहुचा रहे थे जोकि बेहद खतरनाक है।

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