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रूपहले पर्दे पर जाति का स्टीरियोटाइप रचती मैडम चीफ मिनिस्टर

by Rahul Gautam 3 months ago Views 16414

Madam Chief Minister creates stereotype of caste o
भारत में जो कभी नहीं जाती, वो है जाति। जीवन से लेकर मरण तक तमाम भारतीयों के लिए जाति ही सबकुछ तय करती है। ऐसे में इस विषय पर फिल्म बनाना और भी मुश्किल हो जाता है। गैंग्स ऑफ़ वासेपुर और फुकरे जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस ऋचा चड्डा की नई फिल्म मैडम चीफ मिनिस्टर कुछ इसी वजह से विवादों में घिर गई है। दरअसल, कहने को तो यह फिल्म काल्पनिक है लेकिन टाइटल और फिल्म के पोस्टर से अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि यह फिल्म देश की एकमात्र दलित महिला मुख्यमंत्री रहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती के जीवन से प्रभावित है जिन्होंने उत्तर प्रदेश की बागडोर 4 बार संभाली।

ऋचा चड्ढा ने हाल ही में इस फिल्म के फर्स्ट लुक पोस्टर को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इस पोस्टर में वह झाड़ू पकड़े हुए और गंदगी में ढकी हुई दिखाई दे रही हैं। टैगलाइन में लिखा है, "अछूत, अजेय।"


अब इसी पोस्टर के चलते उनपर दलित समुदाय को गलत तरीके से पेश करने और उन्हें स्टीरियोटाइप पेश करने का आरोप लग रहे हैं। मसलन, यह किसी से छुपा नहीं है की दलित ही सफाई और अन्य कथित रूप से छोटे काम करते हैं। ऐसे में फिल्म जैसे एक बड़े माध्यम में इस तरह एक दलित को झाड़ू के साथ दिखाने से एक ख़ास तरह की छवि ही सामने आती है।

ऋतुजा नाम की एक ट्विटर यूजर ने फिल्म के पोस्टर की तीखी आलोचना करते हुए लिखा - ऋचा चड्डा सवर्ण नारीवादियों का सटीक उदाहरण है, जो आसानी से "कैंसिल कल्चर" जैसे शब्दों का उपयोग करती हैं ताकि हाशिये पर पड़े समुदायों के असंवेदनशील प्रतिनिधित्व पर होने वाली उनकी किसी भी वैध आलोचना को खारिज कर सके।

संकुल नाम के एक और यूजर ने कहा- वैसे तो ऋचा चड्ढा दलितों की बात सुनने और यह समझने में समय लगा सकती थी कि उनकी फिल्म के जातिवादी पोस्टर की आलोचना क्यों हो रही है। इसके बजाय उन्होंने पूरा दिन ट्विटर पर हर उस व्यक्ति की आलोचना को दरकिनार करने में लगाया जिसने उसकी फिल्म की आलोचना की।

एक और महिला यूजर ने लिखा - लोग इतने हैरान क्यों हैं कि ऋचा चड्डा ने उनकी बात नहीं मानी? बॉलीवुड पूरी तरह से आपकी टूटी हुई पीठ से पैसा बनाने के लिए मौजूद है। हाशिए पर पड़े लोगों की पीड़ा को मिर्च मसाला लगाकर अमीर, उच्च जाति को परोसता रहा है। मुसलमान यह बात दशकों से जानते हैं।

हालांकि, ऋचा चड्डा ने ऐसे आरोपों को सिरे से नकार दिया है है। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा - कुछ लोगो को कोई अंदाज़ा नहीं है कि फिल्मे कैसे बनती है,  कैसे कास्टिंग होती है और कैसे उसकी प्रमोशन होता है।फिल्म को लेकर बेवजह आलोचना हो रही है जो बिलकुल बचकाना है।

वैसे कुछ लोग इस फिल्म के पोस्टर की तुलना रजनीकांत की तमिल फिल्म कालां से भी कर रहे हैं जिसे दलित फ़िल्मकार Pa. Ranjith ने बनाया था।  इस फिल्म का मुख्य पात्र रजनीकांत ने ही निभाया था और इसमें किसी प्रकार से दलितों को किसी ख़ास सांचे में नहीं दिखाया गया था।

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