अप्रैल में छिन गया 75 लाख लोगों का रोज़गार, बरोज़गारी दर 4 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर: CMIE

by Siddharth Chaturvedi 4 months ago Views 2482

Unemployment rate rises to 4-month high as Covid s
यह महामारी की दोतरफा मार है। कोरोना की दूसरी लहर एक तरफ लोगों की जान ले रही है तो दूसरी तरफ लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी छीन रही है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के मुताबिक अप्रैल के महीने में देश में 75 लाख से ज़्यादा लोगों की नौकरियां चली गई हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि देश में बेरोज़गारी की दर 8 फीसदी के करीब जा पहुंची है। यह जानकारी सीएमआईई के प्रमुख महेश व्यास ने दी है। व्यास के मुताबिक आने वाले दिनों में भी रोज़गार के मोर्चे पर देश के हालात लगातार मुश्किल बने रहने की आशंका है।

सीएमआईई के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल के महीने में पूरे देश की औसत बेरोज़गारी दर बढ़कर 7.97 फीसदी हो गई है, जो 4 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले मार्च के महीने में बेरोज़गारी दर का राष्ट्रीय औसत 6.50 फीसदी था। शहरी इलाकों का हाल तो और भी ख़राब है, जहां अप्रैल में बेरोज़गारी की दर 9.78 फीसदी पर जा पहुंची है। इसके मुकाबले गांवों की हालत कुछ कम ख़राब है, जहां बेरोज़गारी 7.13 फीसदी दर्ज की गई है। मार्च के महीने में शहरी और ग्रामीण, दोनों ही इलाकों में बेरोजगारी दर अप्रैल के मुकाबले कम थी।


कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण देश के कई इलाकों में लॉक डाउन जैसे हालात हैं। इन इलाकों में सिर्फ बेहद ज़रूरी गतिविधियों की ही इजाज़त है, जबकि ज़्यादातर बाकी कामकाज बंद पड़े हैं। इसके कारण आर्थिक गतिविधियों पर कुल मिलाकर काफी बुरा असर पड़ रहा है। लाखों लोगों की नौकरियां छिन जाना इसी का नतीजा है।

महेश व्यास का कहना है कि वे कोरोना की दूसरी लहर के पीक के बारे में तो कुछ नहीं कह सकते, लेकिन यह ज़रूर बता सकते हैं कि मौजूदा हालात की वजह से रोज़गार पर भारी दबाव पड़ रहा है।

उनका अनुमान है कि आने वाले दिनों में बेरोज़गारी लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। साथ ही लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। दोनों में एक साथ गिरावट आने से भी इनकार नहीं किया जा सकता, जो सबसे बुरा होगा। हालांकि व्यास ने यह भी कहा कि अभी हालात उतने बुरे नहीं हैं, जितने पिछले साल लागू किए गए पहले लॉकडाउन के दौरान हो गए थे। उस वक्त तो बेरोजगारी की दर 24 फीसदी तक जा पहुंची थी।

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