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भारतीय अर्थव्यवस्था पर छाई अनिश्चितता, भविष्य का अनुमान लगाना मुश्किल : आरबीआई

by Rahul Gautam 6 months ago Views 1517

Uncertainty over Indian economy, difficult to pred
भारतीय अर्थव्यवस्था पर छाई मंदी को लेकर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का कहना है की आने वाला समय अनिश्चिंतायो से भरा हुआ है। आरबीआई की अक्टूबर महीने के लिए जारी मॉनिटरी पॉलिसी में कहा है चालू वित वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में अभूतपूर्व 23.9 फीसदी की गिरावट और घरेलू आर्थिक गतिविधियाँ  महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुईं है । इसके चलते उद्योग और सेवाओं से संबंधित सूचकांक एक मिलीजुली तस्वीर पेश करते हैं। आसान भाषा में कहे तो भविष्य को लेकर ठोस रूप से नहीं जा सकता।

आरबीआई का कहना है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोज़गार योजना और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत बढ़ी हुई मजदूरी से  ग्रामीण क्षेत्रों में मांग मज़बूत हो रही है किंतु शहरी इलाक़ो में मांग कमजोर बनी हुई है। आसान भाषा में कहे तो कोरोना और उसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन ने गावों से ज्यादा शहरों पर असर डाला है।


अगर बात करे कंस्यूमर कॉन्फिडेंस यानि उपभोक्ता के अर्थव्यवस्था, रोज़गार और आमदनी को लेकर विश्वास की तो सितम्बर महीने में ये ग्राफ रिकॉर्ड तोड़ नीचे चला गया। आसान भाषा में कहे तो सितम्बर महीने में मुजौदा आर्थिक परिस्तिथियों में उपभोक्ता बेहद ही निराश था। हालांकि, भविष्य को लेकर उसके नज़रिये में ज़रूर थोड़ा सुधार हुआ है।

इससे अलग कारोबारी उम्मीदों को लेकर मिलीजुली तस्वीर उभर रही है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों को उम्मीद है आने वाले समय में देश में उनके सामान की मांग बढ़ेगी, वही अलग अलग सेवाएं देने वाली कंपनियों का विश्वास अभी तक अर्थव्यवस्था से डिगा हुआ है।

आरबीआई का साफ़ कहना है COVID-19 महामारी की अनिश्चितता जीडीपी के पूर्वानुमानों को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बना रही है। हालांकि, मोटे तौर पर कह सकते है अगर आर्थिक गतिविधियाँ इस वित्त वर्ष में सामान्य हो गई तो अर्थव्यवस्था 2020-21 में 9.5 फीसदी सिकुड़ने के बाद साल 2021-22 में 10.1% की विकास दर हासिल कर सकती है।

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