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भारत में होने वाले निवेश में भारी गिरावट, निवेशक छोड़ रहे हैं भारत का साथ

by Rahul Gautam 6 months ago Views 1474

There is a huge drop in investment in India, inves
केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को पूरी तरह निचोड़ कर रख दिया है। अब ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक देश में आने वाला Private Equity/Venture Capital निवेश सितम्बर महीने तक 21 फीसदी तक घट गई है। सबसे चिंताजनक बात ये है कि अर्थव्यवस्था में अविश्वास इतना ज्यादा है कि निवेशक पहले से लगाया हुआ पैसा भी निकाल रहे हैं।

बात करें निवेश की तो जहां 2019 में 36,385 मिलियन डॉलर का निवेश भारत में हुआ, वहीं इस साल जनवरी से सितम्बर महीने तक मात्र 28,861 मिलियन डॉलर ही भारत में निवेश हुए। यहाँ गौर तलब है कि इस निवेश में एक बहुत बड़ा हिस्सा अकेले मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी का है, जिनके टेलीकॉम कंपनी जिओ में लॉकडाउन में ज़बरदस्त निवेश देखने को मिला।


इसके अलावा 2019 में जहां देश से 115 निवेशकों ने 7,809 मिलियन डॉलर के निवेश को भारत से निकाला, वहीं इस वर्ष सितम्बर महीने तक ही 100 निवेशक 3,590 मिलियन डॉलर देश से निकाल चुके हैं। ध्यान रहे, ये वो पैसा है जो देश में पहले से ही निवेश किया हुआ था लेकिन देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति देख निवेशकों ने पैसे को निकालने में ही भलाई समझी।

इसके अलावा फंड रेज़िंग में भी ज़बरदस्त गिरावट आयी। बता दें फंड रेजिंग ज्यादार नई कंपनिया जिन्हें स्टार्ट अप कहा जाता है वो करती हैं ताकि अपने बिज़नेस को फैला पाए। 2019 में जहां 41 कंपनियों ने 7,878 मिलियन डॉलर उगाये, वहीं अबतक सितम्बर महीने तक केवल 32 कंपनिया ही 4369 मिलियन डॉलर ही उगा पाए।

अब अगर फंड रेजिंग और निवेश के पैसे को जोड़ा जाये, तो मालूम पड़ता है कि जहां 2019 में 36.4 बिलियन डॉलर भारत में लगे, यही आंकड़ा इस वर्ष सितम्बर आते-आते घटकर केवल 28.9 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ।

आसान भाषा में कहें तो कोरोना और उसके बाद लगे वैश्विक लॉकडाउन ने दुनिया के आर्थिक चक्के को धीमा कर दिया था लेकिन भारत को इससे उभरने में काफी मुश्किल झेलनी पड़ रही है। कोरोना और उसके बाद लगे वैश्विक लॉकडाउन ने दुनिया के आर्थिक चक्के को धीमा कर दिया है। कई लोगों का मानना था कि निवेशक चीन को छोड़ भारत की तरफ रुख कर सकते हैं लेकिन आंकड़े इसके इतर कहानी बयान कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक़ एक जहां चीन में निवेश आना जहां जारी है, वहीं भारत में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानि एफडीआई घट गया है।

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