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मंदी के असर ने धीमी कर दी कृषि उत्पादों के निर्यात की रफ़्तार

by Pankaj Srivastava 5 months ago Views 1548

The effects of the recession slowed the pace of ex
भारत में 58 फीसदी लोग कृषि पर निर्भर हैं और 44 फीसदी इसी से अपनी रोजी-रोटी चलाते है। देश बड़ी तादाद में कृषि उत्पादो का निर्यात करके विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूत करता है। लेकिन कृषि उत्पादों के निर्यात का ताज़ा आंकड़ा मिलीजुली तस्वीर पेश कर रहा है। लॉकडाउन की वजह से इस क्षेत्र में  मंदी का असर भी साफ़ नज़र आ रहा है।

आँकड़ों में किसी उत्पाद के निर्यात का ग्राफ ऊपर जा रहा है तो किसी का नीचे। मसलन अप्रैल-सितंबर 2019-20 में भारत 2 हज़ार 31 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात कर रहा था, यही आंकड़ा 2020-21 की इसी तिमाही में बढ़कर हो गया 2 हज़ार 123 मिलियन मीट्रिक टन।


इसी तरह भारत से अप्रैल-सितंबर 2019-20 में 808 मिलियन मीट्रिक टन चीनी बाहर गई, वही यह आंकड़ा 2020-21 की इसी तिमाही में 1362.4 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुँच गया।

इसी तरह देश कपास निर्यात में भी आगे निकल रहा है। अप्रैल-सितंबर 2019-20 में जहाँ 226.44 मिलियन मीट्रिक टन कपास का देश से निर्यात हुआ, वहीं 2020-21 के इसी समयकाल में  यह आँकड़ा बढ़कर 464 मिलियन मीट्रिक टन हो गया।

लेकिन भैंस के मांस के निर्यात में भारत पिछड़ रहा है। अप्रैल-सितंबर 2019-20 में भारत जहाँ 1599.37 मिलियन मीट्रिक टन भैंस के मांस का निर्यात कर रहा था, वहीं, अप्रैल-सितंबर 2020-21 में यह आँकड़ा घटकर 1365.13 मिलियन मीट्रिक टन रह गया।

दुनियाभर में मशहूर मसालों का निर्यात भी नीचे जा रहा है। भारत से अप्रैल-सितंबर 2019-20 में 1962.34 मिलियन मीट्रिक टन मसाले बाहर भेजे गए, लेकिन यह आंकड़ा 2020-21 की इसी तिमाही में घटकर 1907.79 मिलियन मीट्रिक टन रह गया।

इसी तरह फलों के निर्यात में गिरावट दर्ज़ हुई। साल 2019-20 की अप्रैल-सितंबर तिमाही में जहाँ 277.68 मिलियन मीट्रिक टन फल देश से बाहर भेजे गये, वहीं यह आंकड़ा 2020-21 में घटकर 228.75 मिलियन मीट्रिक टन रह गया।

चूँकि यह आंकड़े लॉकडाउन के बाद के है, ऐसे में अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि कृषि उत्पादों पर भी मंदी का असर है हालांकि पैदावार हर साल नए रिकॉर्ड बना रही है।

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