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मिलने लगे भारतीय अर्थव्यवस्था के मंदी से उबरने के संकेत

by Rahul Gautam 5 months ago Views 1325

Signs of recovery from the slowdown of the Indian
देश में छाई आर्थिक मंदी से उपजी निराशा दूर करने वाली कई खबरें सामने आ रही है। पिछले दिनों ही रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने इतिहास में पहली बार भारत के औपचारिक रूप से मंदी में होने का ऐलान किया था। लेकिन अब विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था का यह आकलन भी आ रहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था मंदी से जल्द उबर सकती है।

ग्लोबल इकोनॉमिक्स फर्म ‘ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स’ के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में उम्मीद से ज्यादा तेजी देखी जा रही है। ‘ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिक्स’ के मुताबिक देश में मुद्रास्फीति दर फ़िलहाल 6 प्रतिशत है, जो थोड़ी ज्यादा है लेकिन जल्द ही इसके नीचे आने के आसार है।


इसके साथ ही ‘गोल्डमैन सैक्’स ने भी भारत के विकास के पूर्वानुमान में सुधार किया है। गोल्डमैन के मुताबिक वित्त वर्ष 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था 10.3 फीसदी सिकुड़ेगी। गोल्डमैन ने पहले अक्टूबर में वित्त वर्ष 2021 में 14.8 फीसदी सिकुड़ने का अनुमान लगाया था। इसके साथ ही एजेंसी का पूर्वानुमान है कि वित्त वर्ष 2022 में विकास दर 13% रहेगी।

इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म ‘मॉर्गन स्टेनली’ के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही से भारत की विकास दर गति पकड़ेगी। मॉर्गन का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी ग्रोथ रेट 9.8 प्रतिशत रहेगी।

उसका मानना है कि चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही आते-आते आर्थिक विकास के सभी सूचकांक महामारी से पहले वाले स्तर तक पहुंच जायेंगे। इसके साथ ही स्टैनले का ये भी अनुमान है कि अगर महामारी काबू में रही तो सेंसेक्स पहली बार जून 2021 तक 50 हज़ार के ऐतिहासिक आँकड़े को छू सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी और उसके प्रसार को रोकने के लिए लगाये गये लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुई थी लेकिन अक्टूबर में आए आँकड़ों ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया को भी आने वाली तिमाही को लेकर आशावान कर दिया है।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा सहित रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के आर्थिक जानकारों का आकलन है कि अर्थव्यवस्था आने वाले तिमाही से पहले ही सुधर सकती है। इससे पहले आरबीआई का मानना था की ऐसा चालू वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में होगा।

ध्यान रहे, पिछले वित्त वर्ष भारत की जीडीपी केवल 4.2 फीसदी थी। अर्थव्यवस्था लगातार ढलान पर है। ऐसे में अर्थव्यवस्था में तेज़ सुधार का संकेत काफी उत्साहवर्धक है।

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