अर्थनीति- चीन में सरकारी, भारत में निजी

by GoNews Desk 1 month ago Views 739

भारत, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में निजी और विदेशी पूंजी को ज़्यादा शक्ति देकर अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ कमज़ोर कर रहा है...

Post Pandemic Economy: India Dilutes Public Sector
भारतीय शेयर बाज़ार में कंपनियों के मूल्यांकन और उनके बाज़ार पूंजीकरण की वजह से रिकॉर्ड उछाल देखे जा रहे हैं। जून 2020 से शेयर बाज़ार में ऐतिहासिक उछाल देखा गया है। जल्दबाज़ी में की गई लॉकडाउन की वजह से जीडीपी में 23 फीसदी की गिरावट आ गई थी बावजूद इसके शेयर बाज़ार में महीने-दर-महीने बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।

ब्लूमबर्ग डेटा विश्लेषण के मुताबिक़, अगर बाज़ार सितंबर महीने में भी सकारात्मक रहता है, तो यह निवेशकों के लिए लगातार आठवां महीना होगा- जो 2007 के लाभ के दिनों के बाद से नहीं देखा गया है।


बाज़ार पर नज़र रखने वालों का अनुमान है कि पैसे की अघिकता की वजह से यह सकारात्मकता देखी जा रही है। पश्चिमी देशों द्वारा महामारी को क़ाबू करने और लॉकडाउन के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए 11 ट्रिलियन डॉलर की घोषणा भी बाज़ार में सकारात्मकता की वजह है। यह पैसा भारतीय बाज़ार में आ रहा है जहां विदेशी पूंजी या एफआईआई का निवेश जारी है।

कई कंपनियों के आईपीओ और केन्द्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण करने की दिशा में उठाए गए क़दमों की वजह से चालू वित्त वर्ष 2021 के दौरान भारतीय शेयर बाज़ार का प्रदर्शन बेहतर देखने को मिल सकता है। चीन- जो एक मात्र उच्च रिटर्न विकल्प था वो नए नियमों के तहत प्राइवेट कंपनियों को सीमित कर रहा है। ऐसे में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए भारतीय शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

नतीजतन, भारत की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप या बाज़ार पूंजीकरण में जून 2020 से अबतक 70 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है।

मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इन्वेस्टमेंट द्वारा किए गए विश्लेषण के मुताबिक़ साल 2018 के बाद यह पहली बार है जब भारतीय बाज़ार ग्लोबल मार्केट इंडेक्स की तुलना में निवेशकों के लिए एक बेहतर रिटर्न का विकल्प बन रहा है। दूसरी ओर, चीनी लिस्टेड फर्मों के बाज़ार पूंजीकरण में जून 2020 से सिर्फ 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है।

वास्तव में, चीन सरकार के Tencent और अलीबाबा जैसे दिग्गजों के मार्केट कैप को नुकसान पहुंचाने वाले नए नियम लागू करने की वजह से चीनी लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में  गिरावट भी देखी गई है। लेकिन एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के दृष्टिकोण में अंतर है।

एक तरफ भारत सरकार ने घोषणा की है कि वो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का ‘मोनेटाइजेशन’ कर अगले पांच साल में 82 अरब डॉलर जुटाएगी, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। हालांकि पहले से ही भारत के मार्केट कैप में सरकार द्वारा नियंत्रित फर्मों की हिस्सेदारी 10 फीसदी है और इक्विटी के और कमज़ोर पड़ने पर यह 5 फीसदी तक कम हो सकता है।

दूसरी ओर, देश के मार्केट कैप में चीन की सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी आज 45 फीसदी से ज़्यादा है और निजी क्षेत्र के सिकुड़ने के साथ, यह संभव है कि बीजिंग देश के आधे से ज़्यादा मार्केट कैप को नियंत्रित कर ले।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी सरकार अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, जबकि भारत, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में निजी और विदेशी पूंजी को ज़्यादा शक्ति देकर अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ कमज़ोर कर रहा है। दोनों एशियाई दिग्गजों में यही बड़ा फर्क़ है।

ताज़ा वीडियो