राजनीति ले डूबी, ज़ी-सोनी मर्जर की कहानी

by GoNews Desk 8 months ago Views 4279

ZEE-Sony Merger Matrix 
ज़ी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स के विलय का ऐलान हो गया है। ज़ी देश की सबसे बड़ी क़र्ज़ में डूबी कंपनियों में से एक थी। कंपनी पर 71,000 करोड़ रूपये का क़र्ज़ था यानि कंपनी 10 अरब डॉलर के क़र्ज़ में थी। इस डील के बाद बुधवार को इसके शेयर में 31 फीसदी का उछाल देखा गया और यह पिंक पेपर्स और बिज़नेस न्यूज़ चैनलों की टॉप स्टोरी रही। 

हरियाणा के कमोडिटी ट्रेडर सुभाष चंद्रा द्वारा 1992 में लॉन्च किया गया भारत का पहला निजी टीवी चैनल इस बात की शोकेस कहानी थी कि कैसे भारत में बाज़ार उदारीकरण ने उद्यमिता और बाज़ार की सफलता की संस्कृति को जन्म दिया। ज़ी की 49 चैनलों के माध्यम से दुनिया के 173 देशों तक पहुंच है। कंपनी के इन देशों में 1.3 अरब दर्शक हैं।


लेकिन टीवी जगत के दिग्गज सुभाष चंद्रा को जो एक चतुर व्यवसायी हैं, राजनीति में दिलचस्पी के बाद उनके लिए मुसीबतें बढ़ गई। 2014 में उनकी वैचारिक रूप से गठबंधन पार्टी भाजपा के सत्ता में आने के बाद वह अपने गृह राज्य के चुनावों में दबदबा बना रहे थे और ज़ाहिर तौर पर उनके पास अपने साम्राज्य के लिए बहुत कम समय था। हां लेकिन इसका फायदा यह हुए कि उन्हें भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में एक पीछे की जगह मिल गई। इसकी कीमत काफी ज़्यादा रही, हालांकि उनके बेटे पुनीत गोयनका कंपनी के मामलों की देखभाल कर रहे थे।

अगस्त 2021 सुभाष चंद्रा ने घोषणा की कि उन्होंने प्रमोटरों के हिस्से को कम करके अपने 91 फीसदी कर्ज का भुगतान किया था और बाकी का भुगतान बहुत जल्द करने के लिए आश्वस्त थे। इसी समय, उन्होंने बताया कि वो बाकि का क़र्ज़ जल्द ही चुका देंगे। उन्होंने कंपनी पर क़र्ज़ को लेकर भी खुलासा किया था और उन्होंने 7000 करोड़ रूपये के क़र्ज़ की बात कबूल की थी।

यह स्पष्ट रूप से सोनी कॉर्पोरेशन ऑफ जापान की सहायक कंपनी सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया के साथ विलय की तैयारी में था। अब दोनों कंपनियों के पास लगभग 30 फीसदी दर्शकों की हिस्सेदारी है और स्टार इंडिया नेटवर्क की तुलना में बड़ा मनोरंजन दिग्गज बन गया है जिसे हाल ही में रूपर्ट मर्डोक ने डिज्नी को बेच दिया है। 

इस मेगा मर्जर के पीछे की संख्या स्पष्ट रूप से यह कहानी बताती है कि सोनी अब 52 फीसदी हिस्सेदारी के साथ एक बड़ा भागीदार है, हालांकि ZEE का भारत में एक बड़ा पदचिह्न है और दुनिया भर में एक अविश्वसनीय पहुंच भी है। हालाँकि ZEE की नई वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी के पास 623 करोड़ या 85 मिलियन डॉलर नक़द शेष है, जबकि सोनी के पास 1,575 मिलियन नक़द है जिससे कंपनी मर्जर के बाद ज़ी में निवेश करेगी।

अंत में, श्री सुभाष चंद्रा ज़ी न्यूज़ और इसके विभिन्न रिज़नल चैनलों पर नियंत्रण रखते हैं जिसकी वजह से वो भारतीय बाज़ार में अपना प्रभाव क़ायम कर पाए। यह जीवन से बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा वाले शख़्स के लिए ज़रूरी है।

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