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पीएम किसान निधि योजना: करोड़ों के विज्ञापन और मिलते हैं 13 रुपये 33 पैसे प्रति दिन

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1295

2011 की जनगणना के मुताबिक देश में हाउसहोल्ड साइज ( एक परिवार के सदस्यों की गनती) था 4.8 यानि तक़रीबन 5 लोग। अब अगर 18 हज़ार करोड़ रुपए को 9 करोड़ किसान परिवारों में बाँटा जाये, तो पता चलेगा कि हर परिवार को मिले 2000 रुपये।

PM Kisan Nidhi Scheme: Advertisements worth crores
देश में किसानों और सरकार के बीच अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है। किसान केन्द्र सरकार पर कृषि क्षेत्र को कॉरपोरेट हाथों में सौंपने का आरोप लगा रहे है जबकि सरकार किसान हितैषी होने का दावा करते हुए विज्ञापनों पर करोड़ो रुपए खर्च कर रही है। कृषि मंत्रालय के एक ऐसे ही विज्ञापन में कहा गया है की पीएम किसान निधि योजना के अंतर्गत 9 करोड़ किसानों को 18 हज़ार करोड़ रुपए दिये गये हैं। पर अगर ग़ौर से देखें तो यह मदद ऊँट के मुँह में ज़ीरे के समान है।

दरअसल, इस योजना के तहत प्रति वर्ष उन किसान परिवारों को 6000 रुपए की तीन किस्तों में मदद की जाती है, जिनके पास 2 एकड़ तक ज़मीन होती है। इस योजना की परिभाषा में एक परिवार का मतलब पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे हैं। सुनने में 18 हज़ार करोड़ रुपए आपको शायद बड़ी रकम लगे लेकिन जिस देश में 54 फीसदी लोग खेती से जुड़े हों, वहाँ यह आँकड़ा ख़ास मायने नहीं रखता।


2011 की जनगणना के मुताबिक देश में हाउसहोल्ड साइज ( एक परिवार के सदस्यों की गनती) था 4.8 यानि तक़रीबन 5 लोग। अब अगर 18 हज़ार करोड़ रुपए को 9 करोड़ किसान परिवारों में बाँटा जाये, तो पता चलेगा कि हर परिवार को मिले 2000 रुपये। पाँच सदस्यों का औसत माना जाये तो परिवार के हर सदस्य के हिस्से आते हैं लगभग 400 रुपये। आसान भाषा में कहे तो हर लाभान्वित परिवार के व्यक्ति को खर्चे के लिए मिले 13 रुपए 33 पैसे प्रतिदिन। आप सोचिये कि 13 रुपए में किसी व्यक्ति के एक दिन के खाने, कपडे, दवाई आदि के खर्च का जुगाड़ कैसे हो सकता है?

वैसे, ग़ौर करने की बात यह भी है कि यह पैसा केवल उन्हीं लोगो को दिया गया जिनके पास खेती की ज़मीन थी। ऐसे खेतिहर मज़दूरों और भूमिहीन मज़दूरों को इससे कोई लाभ नहीं मिला जो   दूसरों की ज़मीन पर काम करते हैं। ऐसे लोगों का न कभी सब्सिडी मिलती है और ना ही किसी प्रकार की अन्य सरकारी सहायता।

एक हक़ीक़त ये भी है कि किसानों की आय शहर में काम करने दिहाड़ी मज़दूरों से भी कम है। मसलन भारत सरकार के 2015-16 के अपने आँकड़े बताते हैं कि बिहार में एक किसान परिवार 45 हज़ार 317 रुपए सालाना कमाता है यानि बिहार का एक किसान परिवार  औसतन 124 रुपये प्रति दिन में अपना गुजारा करता है।

परिवार में पाँच सदस्यों का औसत मानें तो एक व्यक्ति के हिस्से 25 रुपए प्रतिदिन से कम आयेगा। इसी तरह उत्तराखंड में एक किसान परिवार 61 हज़ार 833 रुपए, ओडिशा में 63 हज़ार 285 रुपए और  छत्तीसगढ़ में 71 हज़ार 68 रुपए सालाना कमाता है। इससे देश के किसानों की आर्थिक परशानियों का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।

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