एक तिहाई 'स्टॉक मार्केट' सिर्फ़ 10 हाथों में

by Siddharth Chaturvedi 6 months ago Views 3104

One third stock market only in ten hands
कोरोना महामारी के पहले साल में देश की बड़ी कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन यानि स्कॉक बाज़ार में उनकी कीमत की बात करें तो पता चलता है कि कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का क़रीब 31% हिस्सा सिर्फ़ दस बड़ी कंपनियां के ही पास है जिससे साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि किस तरह अब मुनाफ़ा और पूँजी चंद हाथों तक सिमटकर रह गयी है।

कोरोना का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है, एक तरफ़ बेरोज़गारी दर बढ़ा है तो दूसरी तरफ़ ग़रीबी भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई है। वहीं कोरोना संकट के दौर में देश की कई सेक्टरों को भारी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हज़ारों कंपनियों ने अपनी मर्ज़ी से कारोबार बंद कर दिया है। पर इन सबसे अलग एक ऐसी भी तस्वीर है जिसे अगर देखें तो लगता है कि कोरोनाकाल से अगर चुनिंदा उद्योगपतियों को कुछ मिला है तो वो है बस मुनाफ़ा।


अगर पिछले वित्त वर्ष के मुक़ाबले इस वित्त वर्ष की बात करें तो टॉप 10 कंपनियों की लिस्ट में शीर्ष पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. ही मौजूद है, वहीं दूसरे स्थान पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) उसके बाद एचडीएफसी बैंक लि. और फिर इन्फोसिस मौजूद है। पाँचवे स्थान पर हिंदुस्तान यूनिलीवर लि. के बाद क्रमश: एचडीएफसी, आईसीआईसीआई बैंक लि., कोटक महिंद्रा बैंक लि., स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बजाज फाइनेंस लि. मौजूद हैं।

वहीं अगर इन कंपनियों के मार्केट कैप की तुलना पिछले वित्त वर्ष से की जाए तो साफ़ पता चलता है कि कोरोना काल में इन कंपनियों ने भारी वृद्धि की है। शीर्ष पर मौजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. के मार्केट कैप में पिछले वित्त वर्ष के मुक़ाबले 82.14% की बढ़त हुई है, वहीं ग़ौर करने वाली बात यह है कि 10वे स्थान पर मौजूद बजाज फाइनेंस लि. ने 134.69% के साथ सबसे ज़्यादा बढ़त दर्ज कराई है।

वहीं ग़ौर करने वाली बात यह है कि इस सूची में कुछ कंपनियों ने छलाँग लगाई है तो कुछ कंपनियाँ हल्का सा लुढ़की भी हैं। पिछले साल एचडीएफसी बैंक लि. जहाँ चौथे स्थान पर मौजूद था वहीं इस वित्त वर्ष में उसने एक स्थान कमाकर तीसरे स्थान पर अपनी जगह पक्की की है, वहीं इन्फोसिस जो पिछले साल छटे स्थान पर था वो अब चौथे स्थान पर आ गया है। इसके बाद आता है आईसीआईसीआई बैंक लि. जो पिछले साल दसवें स्थान पर था और इस वित्त वर्ष में सातवें स्थान पर पहुँच गया है, साथ ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 11वे स्थान से 9वे स्थान पर पहुँच गया और  बजाज फाइनेंस लि. ने 14वे स्थान से छलाँग लगाकर 10वे स्थान पर पहुँचकर शीर्ष दस में अपनी जगह बनाई है। ग़ौर कीजिए कि टॉप 10 में से कुल 6 फ़ाइनैन्स कंपनियाँ ही हैं।

वहीं कुछ कंपनियाँ इस लिस्ट में लुढ़की भी है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लि. जो पिछले साल तीसरे स्थान पर थी वो अब पाँचवे स्थान पर आ गई है, वहीं पिछले वित्त वर्ष में पाँचवे स्थान पर मौजूद एचडीएफसी एक स्थान लुढ़ककर इस वित्त वर्ष में छटे स्थान पर पहुँच गई है और सातवे स्थान पर मौजूद कोटक महिंद्रा बैंक लि. इस वित्त वर्ष में आठवें स्थान पर पहुँच गया।

वैसे हाल में चर्चा में रहा अदाणी ग्रुप भले ही टॉप 10 की लिस्ट में शामिल ना हो पर अगर कंपनी की 2017 से अभी तक की ग्रोथ देखें तो पिछले 4 सालों में अदाणी ग्रुप का मार्केट कैप 496.31% बढ़ा है। वहीं अगर शीर्ष पर मौजूद रिलायंस की 2017 से अभी तक की ग्रोथ देखें तो पिछले 4 सालों में रिलायंस का मार्केट कैप 228.22% बढ़ा है।

पिछले आठ सालों में मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी ग्रुप की ग्रोथ तो हुई ही है, साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी दोगुना हो गया है। अभी तक यही कहा जाता था कि भारतीय शेयर बाजारों को चलाने में रिलायंस इंडस्ट्रीज की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन, अब मार्केट के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में मार्केट मूवमेंट का महत्वपूर्ण फैक्टर अदाणी ग्रुप होगा।

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