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अप्रैल से जून में भारत में निवेश 56 फ़ीसदी तक घटा, चीन ने मारी बाज़ी

by Rahul Gautam 6 months ago Views 1818

Investment in India decreased by 56% from April to
कोरोना और उसके बाद लगे वैश्विक लॉकडाउन ने दुनिया के आर्थिक चक्के को धीमा कर दिया है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक इससे पूरी दुनिया में उथल-पुथल है और नए आर्थिक समीकरण उभर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि निवेशक चीन को छोड़ भारत की तरफ रुख कर सकते हैं लेकिन आंकड़े इसके इतर कहानी बयान कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक़ एक जहां चीन में निवेश आना जहां जारी है, वहीं भारत में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानि एफडीआई घट गया है।

बात करें अगर चीन की तो, दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में शुमार Toyota ने जून 2020 में लगभग 9 अरब युआन का निवेश कर टियांजिन प्रान्त में कारखाना लगाया। इसके अलावा जुलाई 2020 में डेमलर नाम की यूरोपियन कंपनी ने 804 मिलियन युआन का निवेश किया।


एक और जर्मन ऑटोमोबाइल कंपनी Volkswagon ने मई 2020 में चीन में 1.1 बिलियन युआन निवेश करने का एलान किया था। जुलाई 2020 में यूरोपियन फ़ूड ब्रांड ने एक चीनी का अधिग्रहण कर 100 मिलियन यूरो का निवेश चीन में किया। इसके अलावा और भी कई अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों जैसे पेप्सी, क्वालकॉम, शैल ग्रुप, हनीवेल इंटरनेशनल ने अरबों डॉलर का निवेश चीन में ही करना बेहतर समझा, वो भी शुरू हुई महामारी के बाद।

ध्यान रहे, ये वही कोरोनाकाल है जब पूरी दुनिया लॉकडाउन में थी और आशंका जताई जा रही थी की पैसा चीन से निकलकर भारत आएगा लेकिन इसकी उल्टी तस्वीर भारत में दिखती है।

एफडीआई को रिपोर्ट करने वाली सरकारी एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ़ प्रोमोशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के अप्रैल से जून तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान भारत में आने वाला निवेश उल्टा घट गया। जहां अप्रैल से जून 2019 में 1 लाख 13 हज़ार 511 करोड़ का निवेश हुआ था, वहीं 56 हज़ार करोड़ घटकर इस वर्ष इसी काल में 49 हज़ार 820 करोड़ रुपए रह गया।

आसान भाषा में कहें तो चीन अभी भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ और भारत को निवेश आकर्षित करने के लिए और नया कुछ करने की ज़रूरत है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आँकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून की तिमाही में चीन की जीडीपी विकास दर 12 फ़ीसदी से ज़्यादा रही है, जबकि भारत की विकास दर 25 फ़ीसदी नीचे गिरी है।

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