भारत का व्यापार संकट: तेल की ऊंची कीमतों पर घाटा 175 फीसदी बढ़ा

by GoNews Desk 1 week ago Views 203

इस साल कच्चे तेल की उच्च कीमतों की संभावना के साथ भारत के व्यापार घाटे में गिरावट की उम्मीद काफी कम हैं...

India’s Trade Trouble: Deficit Increases 175% On H
सरकार द्वारा कच्चे तेल की भारी मात्रा में आयात की वजह से भारत के निर्यात पर होने वाले फायदे मानो ख़त्म हो गए हैं। मसलन भारत का आयात, निर्यात से कहीं ज़्यादा है। हालांकि सरकार को विश्वास है कि इस साल 400 अरब डॉलर के रेकॉर्ड निर्यात से यह संकेत मिलेगा की अर्थव्यवस्था तेज़ी पकड़ रही है, लेकिन पहली दो तिमाहियों के लिए जारी आंकड़े एक और रेकॉर्ड व्यापार घाटे की कहानी बयां करते हैं।

केन्द्र ने महामारी के ख़त्म होने के साथ ही दावे किए कि भारत का निर्यात बढ़ रहा है जो “आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में एक क़दम है। जबकि अक्टूबर महीने में भारत का व्यापार घाटा 19.9 अरब डॉलर के प्रारंभिक अनुमानों की तुलना में 19.7 अरब डॉलर था, जो पिछले अक्टूबर महीने में 9.15 अरब डॉलर की तुलना में दोगुने से भी ज़्यादा है।


इस साल अप्रैल से अक्टूबर महीने की अवधि के दौरान भारत का व्यापार घाटा 97.8 अरब डॉलर था, जबकि यह साल 2020 में सिर्फ 35.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा था। ग़ौर करने वाली बात है कि यह आंकड़े महामारी के बाद के हैं।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक़ भारत द्वारा कच्चे तेल की ख़रीद में 140.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है जिसकी वजह से आयात 62.5 फीसदी बढ़कर 55.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

सरकार के प्रवक्ताओं ने बड़े गर्व से बताया कि भारत का निर्यात 43 फीसदी बढ़कर 35.7 अरब डॉलर हो गया है लेकिन यह भी जानना ज़रूरी है कि उस निर्यात में भारत में उत्पादित की गई वस्तुओं का योगदान असंतुष्ट करने वाले हैं। भारत के कच्चे तेल के आयात में तो 140 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई ही लेकिन भारत का कच्चे तेल का निर्यात भी 240 फीसदी के साथ सबसे ज़्यादा रहा।

भारत द्वारा निर्यात किए गए वस्तुओं में कॉफी का योगदान 81 फीसदी, इंजीनियरिंग सामान का 51 फीसदी और कपास और हथकरघा उत्पादों (या Handloom Products) का निर्यात 46.2 फीसदी रहा। जबकि लौह अयस्क का निर्यात 77 फीसदी तक गिर गया है। इनके अलावा एडिबल ऑयल का निर्यात 51 फीसदी, तिलहन का 16 फीसदी और चाय का निर्यात 11 फीसदी तक घट गया है।

साल 2020 के दौरान भारत के आयात में पेट्रोलियम उत्पादों का योगदान 27 फीसदी से ज़्यादा रहा। इस साल कच्चे तेल की उच्च कीमतों की संभावना के साथ भारत के व्यापार घाटे में गिरावट की उम्मीद काफी कम हैं।

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