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चीन ही नहीं, नेपाल और बांग्लादेश से भी सुस्त रही भारत की जीडीपी प्रति व्यक्ति वृद्धि दर

by Rahul Gautam 1 month ago Views 1300

एक और पड़ोसी देश नेपाल ने पिछले दस सालों में गजब की तरक्की की है। आँकड़ों के मुताबिक 2010 से 2020 तक अर्थव्यवस्था में हर व्यक्ति की हिस्सेदारी में 6.5 % की बढ़ोतरी दर्ज़ हुई है। भारत ने इस मामले में सिर्फ पाकिस्तान को पछाड़ा है।

India's GDP per capita growth rate slower not only
अब यह बात किसी से छिपी नहीं रही कि देश की आर्थिक दशा ख़राब होती जा रही है। नोटबंदी और जीएसटी जैसे कानूनों के देश को काफी हद तक पटरी से उतार दिया है। नतीजा यह है कि पिछले दस सालों में यानि 2010 से 2020 तक भारत में 'जीडीपी पर कैपिटा' वृद्धि दर बेहद सुस्त पाई गई है।

जीडीपी पर कैपिटा का मतलब होता है कुल अर्थव्यवस्था का कितना हिस्सा एक नागरिक के हिस्से आता है। इसकी वृद्धि दर से मालूम पड़ता है कि देश में नागरिकों की आर्थिक स्थिति कितनी मज़बूत या कमजोर हो रही है।


वर्ल्ड मोनेटरी फंड और वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों पर अगर ग़ौर करें तो मालूम पड़ता है की देश में साल 2000 से 2010 तक जीडीपी पर कैपिटा वृद्धि तक़रीबन 12 फीसदी हुई थी लेकिन अगले दशक यानि 2010 से 2020 तक यह घटकर मात्र 3.1 फीसदी रह गयी।

अगर अगर इसकी तुलना करे बांग्लादेश से तो पाते हैं कि पिछले दस सालों में वहा जीडीपी पर कैपिटा वृद्धि दर रही 9.5 फीसदी। यानि भारत से बांग्लादेश इस मामले में बेहतर रहा। वहीं चीन में जीडीपी पर कैपिटा वृद्धि दर साल 2000 से 2010 तक थी 16.8 फीसदी और अगले दशक में गिरावट दर्ज़ होने के बावजूद आँकड़ा 9.2 फीसदी के नीचे नहीं गया।

एक और पडोसी देश नेपाल ने भी पिछले दस सालों में गजब की तरक्की की है। आँकड़ों के मुताबिक 2010 से 2020 तक अर्थव्यवस्था में हर व्यक्ति की हिस्सेदारी में 6.5 % की बढ़ोतरी दर्ज़ हुई है। भारत ने इस मामले में सिर्फ पाकिस्तान को पछाड़ा है, जहाँ पूरे दशक में अर्थव्यवस्था में हर व्यक्ति की हिस्सेदारी में केवल 2.5 % की ग्रोथ दर्ज हुई।

21वीं सदी की शुरुआत के साथ भारत ने तरक्की की शानदार कहानी लिखी थी। लेकिन घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कारणों के चलते भारत की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर होती गई। वित्त वर्ष 2018 से भारत की जीडीपी लगातार गिर रही है और हालिया लॉकडाउन ने तो इसकी कमर ही तोड़कर रख दी है। लगभग 3 महीने पहले अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी फर्म मैक्किंज़े ग्लोबल ने एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत सरकार को अगर अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखना है तो कृषि सेक्टर के अलावा 2023 से 2030 के बीच 9 करोड़ नौकरियाँ पैदा करनी होंगी।

इसके अलावा 3 करोड़ लोगों को कृषि क्षेत्र से निकालकर दूसरे ज्यादा उत्पादक वाले क्षेत्रों में काम पर लगाना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो आशंका है कि देश में अगले 10 साल तक आमदनी बढ़ने पर ब्रेक लग सकता है।

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