भारत की आर्थिक ग्रोथ 2019 के स्तर से भी नीचे रहने का अनुमान - रिपोर्ट

by M. Nuruddin 1 year ago Views 7423

आर्थिक रूप से कमज़ोर और ग़रीब देशों के आर्थिक विकास में ‘के-शेप’ रिकवरी की संभावना...

India's 2021 economic output likely to remain belo
वित्त वर्ष 2021-22 में देश की जीडीपी 2019 के स्तर से भी नीचे रहने वाली है। ये बात एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के लिए काम करने वाली युनाइटेड नेशन की संस्था UNESCAP ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में महामारी के शुरु होने से पहले ही जीडीपी और निवेश धीमा पड़ चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक़ कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किए गए ‘दुनिया के सबसे सख़्त लॉकडाउन’ की वजह से 2020 के दूसरी तिमाही में आर्थिक बाधाएं अपने चरम पर थीं।

लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटना शुरू तो हुई लेकिन सालाना आधार पर शून्य के क़रीब आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान के साथ चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था की गति हल्की पड़ गई। अंग्रेज़ी अख़बार बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान देश की आर्थिक विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान है। जबकि इससे पहले के साल में यानि वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान महामारी के बीच देश की जीडीपी 7.7 फीसदी रहने का अनुमान है।


ग़ौरतलब है कि गोन्यूज़ ने पहले भी आपको बताया था कि देश की जीडीपी महामारी के तीन साल पहले से ही गिर रही है। अगर महामारी के दौरान जीडीपी का आकार देखें तो यह अनुमानित 131.82 लाख करोड़ रूपये था। जबकि यही 2017 में नेट 131.75 लाख करोड़ रूपये रहा था। अब अगर देखा जाए तो सिर्फ महामारी ने नहीं बल्कि सरकार की नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क किया है।

नेश्नल स्टैटिस्टिकल ऑफिस या एनएसओ ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए देश की जीडीपी के 8 फीसदी तक सिकुड़ना का अनुमान लगाया था। इनके अलावा विश्व बैंक और अक्टूबर महीने में ख़ुद रिज़र्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 2020 में देश की जीडीपी 9.5 फीसदी तक सिकुड़ सकती है।

ताज़ा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020 में महामारी के दौरान चीन ही एकमात्र ऐसा देश रहा जिसने कोरोना के बीच अपनी जीडीपी में पॉज़िटिव ग्रोथ दर्ज किया। इनके अलावा रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2021 के दौरान एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के औसतन 5.9 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि 2022 में यह पांच फीसदी रह सकता है।

UNESCAP ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि एक मज़बूत सुधार की उम्मीद के बावजूद आर्थिक रूप से कमज़ोर और ग़रीब देशों के आर्थिक विकास में ‘के-शेप’ रिकवरी की संभावना है।

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