सरकारी कंपनियाँ बेचकर एक लाख 75 हज़ार करोड़ जुटायेगी सरकार

by Rahul Gautam 7 months ago Views 6062

Government will raise one lakh 75 thousand crore b
देश आर्थिक मंदी के अब तक के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहा है और सरकार का खजाना अब खाली होता जा रहा है। स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार अब सरकारी कंपनियों को बेचने में ज़ारों-शोरों से जुटी हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए साफ़ कहा की सरकार विनिवेश यानी सरकरी कंपनियों को बेचना इस साल भी जारी रखेगी। सरकार को आने वाले वित्त वर्ष में विनिवेश से 1 लाख 75 हज़ार करोड़ रुपए की कमाई होने की उम्मीद है।

जिन कंपनियों को सरकार इस वर्ष बेचने को तैयार है, वे हैं बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल, पवन हंस, नीलाचल निगम लिमिटेड आदि जिनकी प्रक्रिया को 2021-22 में पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा 2 और सरकारी बैंक और एक बीमा कंपनी को भी निजीकरण के दायरे में लाया जायेगा।


वैसे, चालू वित्त वर्ष यानि 2020-21 में विनिवेश से होने वाली कमाई का सरकारी लक्ष्य था 2.1 लाख करोड़ रुपये लेकिन सरकार इसका केवल 6.6 प्रतिशत या 13,844.49 करोड़ रुपये ही जुटा पाई थी। इसके साथ ही, विनिवेश नीति को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने नीति आयोग से बेचने वाली कंपनियों की अगली सूची बनाने के लिए कहा है। हालत इतनी खस्ता है कि पैसा जुगाड़ने के लिए सरकार अब अलग अलग महकमों के पास पड़ी अतिरिक्त ज़मीन को भी बेचना चाहती है। इस काम के लिए सरकार जल्द ही एक कंपनी बनाएगी जिसकी देखरेख में सरकारी भूमि को बेचकर और अन्य तरीको से पैसा कमाया जाएगा।

ध्यान रहे, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने 15 सितंबर को माना था कि सरकार तब तक 8 सेंट्रल पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज (CPSEs) को बेच चुकी है, 20 कंपनियों और उनकी यूनिट्स में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया जारी है जबकि 6 कंपनियों पर सरकार ताला लगाने जा रही है

अनुराग ठाकुर ने तब कहा था की केंद्रीय कैबिनेट ने 20 कंपनियों और उनकी यूनिट्स में हिस्सेदारी बेचने की मंज़ूरी दे दी है और इनके विनिवेश की प्रक्रिया जारी है। इनमें प्रोजेक्ट एंड डेवलपमेंट इंडिया लि, इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट (इंडिया) लि,ब्रिज एण्ड रूफ कंपनी इंडिया लि, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लि, भारत अर्थ मूवर्स लि, एयर इंडिया और इसकी पांच सहायक कंपनियां और एक संयुक्त उद्यम, एचएलएल लाइफकेयर लि, एनएमडीसी का नगरनार स्टील प्लांट और इंडियन मेडिसिन एण्ड फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनिया शामिल हैं।

कई ट्रेड यूनियन और राजनीतिक दल शुरू से ही विनिवेश का विरोध करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार राष्ट्र की संपत्ति को बेचकर अपनी आर्थिक विफलता को छुपाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि सरकार विनिवेश करके वहाँ काम करने वालों के भविष्य को खतरे में डाल रही है, साथ ही सरकारी नौकरियों में कमी करके आरक्षण पर भी हमला किया जा रहा है.

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