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क़ीमत गिरने का फल भोग रहे हैं फल-किसान

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1016

Fruit farmers are suffering because of falling pri
देश में किसान साल दर साल फसलों का बंपर उत्पादन कर रहे हैं, इसके बावजूद उनकी माली हालत में सुधार नहीं हो रहा है। कर्ज़ के कुचक्र में फँसकर हर साल हज़ारों किसान ख़ुदकुशी कर लेते हैं क्योंकि कई बार उनकी उगाई फसलों से लागत भी नहीं निकल पाती।

अब मंडियों के ताज़ा आँकड़े बता रहे हैं की फलों की कीमतों में 80 फीसदी तक कमी आ गयी। मंडी के व्यापारियों का मानना है की आयात-निर्यात पर लगी रोक और कोरोना के चलते डिमांड में भारी कमी दर्ज़ हुई जिसके चलते कीमतें पाताल पहुँच गयी हैं।


मसलन 2019 में एक किलो अमरुद की खुदरा बाजार में कीमत 50 रुपए थी, वह इस साल घटकर 15 से 25 रुपए किलो रह गई है। यही हाल कमोबेश पपीता का है जिसकी कीमत खुदरा बाजार में 30 रुपए किलो थी, वह इस वर्ष घटकर 20 से 25 रह गयी है।

अगर बात करे केला की तो पिछले वर्ष एक दर्ज़न केले 40 रुपए बाज़ार में मिल जाते थे, लेकिन इस वर्ष इनकी कीमत भी लुढ़ककर आ गई है 20 से 35 रुपये दर्ज़न हो गयी है। संतरे की कीमत में भी पिछले साल के मुकाबले 5 से 15 रुपए किलो की गिरावट दर्ज़ हुई है।

दूसरे फलों का भी यही हाल है जबकि इनका सीजन चल रहा है। इसके अलावा देश में बाहर से आने वाले फलों की क़ीमत में भी 50 फीसदी तक गिरावट दर्ज हुई है जिसका सबसे बड़ा कारण है सरकार का इम्पोर्ट ड्यूटी को 50 फीसदी से बढ़ाकर 70 फीसदी कर देना।

वैसे देश को फलों से होने वाली आमदनी पिछले कुछ सालों से घटती ही जा रही है। मसलन साल 2017-18 में जहा 28 लाख 99 हज़ार 525 मीट्रिक टन फल-सब्ज़ियाँ देश से बाहर गयी, वही ये आंकड़ा 2019-20 में  26 लाख 55 हज़ार 587 मीट्रिक टन रह गया। इससे होने वाली आमदनी भी 13.85 अरब डॉलर से घटकर 12.77 अरब  डॉलर रह गयी।

भारत में कृषि पर 58 फीसदी लोग निर्भर है और 44 फीसदी इससे अपनी रोजी-रोटी चलाते है। देश बड़ी तादाद में कृषि उत्पादो को निर्यात करके विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूत करता है।अगर जल्द ही इसपर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

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