एमएसपी पर किसान यूँ ही नहीं आशंकित, सरकार घटा रही है फ़ूड सब्सिडी

by Rahul Gautam 1 year ago Views 2451

सरकार ने 2019-20 के बजट में फ़ूड सब्सिडी पर 1 लाख 84 हज़ार करोड़ रुपए आवंटित किये थे और 12 मार्च, 2020 तक 1 लाख 56 हज़ार करोड़ रुपए रिलीज़ कर दिए थे।

farmers protest
नए कृषि कानूनों से नाराज़ किसान पिछले 28 दिनों से कड़ाके की ठंड के बीच सड़क पर है। किसान आरोप लगा रहे हैं कि सरकार एमएसपी ख़त्म कर रही है हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसको मात्र भ्रम बता रहे हैं। तो फिर मामला क्या है। दरअसल, इस वर्ष बजट से पहले आने वाले इकनोमिक सर्वे में सरकार ने कहा था कि वो फ़ूड सब्सिडी का खर्च कम करना चाहती है। उस समय भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार के.वी सुब्रह्मण्यम ने कहा था की या तो गरीबों को दिए जाने वाले राशन की कीमत बढ़ायी जाये, या फिर जितने लोगों को राशन मिलता है, उनकी तादाद कम की जाये। कुल मिलकर सरकारी ख़ज़ाने पर बोझ कम करने की कवायद शरू की जाये।

और हुआ भी बिलकुल वही। सरकार ने 2019-20 के बजट में फ़ूड सब्सिडी पर 1 लाख 84 हज़ार करोड़ रुपए आवंटित किये थे और 12 मार्च, 2020 तक 1 लाख 56 हज़ार करोड़ रुपए रिलीज़ कर दिए थे। इस धनराशि में से 1 लाख 19 हज़ार 164.O2 करोड़ रुपए सब्सिडी के तौर पर फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (FCI) यानि भारतीय खाद्य निगम को दिए गए थे जो कि अनाज मंडियों में जाकर किसान से उपज खरीदती है। इसके अलावा राज्यों की अलग अलग एजेंसियाँ से अनाज ख़रीदेने के लिए भी FCI को केंद्र सरकार ने 2019-20 में 36 हज़ार 860.62 करोड़ जारी किये थे।


लेकिन चालू वित्त वर्ष में सरकार ने कुल फ़ूड सब्सिडी में बड़ी कटौती की और 2020-21 में 1 लाख 15 हज़ार 319.68 करोड़ रुपए ही आवंटित किये।

अब एक और तस्वीर देखिये। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में भारतीय खाद्य निगम पर चढ़ा क़र्ज़ 3 लाख करोड़ के पार जा चुका है। इसी आंकड़े में निगम का 1.45 लाख करोड़ भी शामिल है जो कि केंद्र सरकार पर बकाया है। साल 2014-15 में निगम 1 लाख 616 करोड़ रुपए के कर्ज़े में था, जो साल 2019-20 में बढ़कर 3 लाख करोड़ से भी ज्यादा हो गया है। यानी सरकार को पैसा चुकाना था एफसीआई को, लेकिन सरकार ने पहले ही कटौती कर दी है। ऐसा लगता है की सरकार चाहती है एफसीआई कम से कम अनाज एमएसपी पर ख़रीदे क्योंकि उसके पास इस मद के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है।

किसानों की भी यही आशंका है कि नए कानून के लागू होने के बाद कि एमएसपी की कोई वैधानिकता नहीं रहेगी। सरकार अनाज ख़रीद के लिए बाध्य नहीं होगी और उन्हें बाज़ार के शोषण का शिकार होना पड़ेगा। ध्यान रहे, आँकड़े भी बताते हैं जिन राज्यों में सरकारें किसानों की पैदावार की बड़े पैमाने पर ख़रीदती हैं, वहाँ के किसान तुलनात्मक रूप से ज़्यादा सम्पन्न हैं। पंजाब और हरियाणा के किसानों की सम्पन्नता और बिहार के किसानों की ग़रीबी के पीछे यह बड़ा कारण है।

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