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लगातार दूसरी तिमाही में सिकुड़ी अर्थव्यवस्था, भारत औपचारिक रूप से मंदी का शिकार

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1666

Economy shrinks for second consecutive quarter, In
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक के बाद एक बुरी खबर आ रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जुलाई -सितंबर की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी 7.5 प्रतिशत सिकुड़ गयी है। गौर करें, यह आँकड़े उस समय काल के है जब देश में लॉकडाउन ख़त्म हो चुका था और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए सरकार ‘आत्मानिर्भर भारत’ और तमाम दूसरी नई योजनाए चला रही थी। लगातार दो तिमाही में सिकुड़ने से अब भारतीय अर्थव्यवस्था आधिकारिक तौर से मंदी के चक्र में प्रवेश कर चुकी है।

ताज़ा जारी हुए इन आँकड़ों के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और बिजली, गैस, पानी की आपूर्ति और अन्य उपयोगी सेवाओं को छोड़कर बाकी के 5 कोर सेक्टरों में भारी गिरावट दर्ज हुई है। निर्माण क्षेत्र में 8.6 फीसदी की गिरावट हुई, जबकि पिछली तिमाही में यही आँकड़ा -50.3 प्रतिशत था।


इसके अलावा माइनिंग क्षेत्र में 9.1 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई, जबकि पिछली बार इसमें 23.3 फीसदी की गिरावट आई थी। पिछली तिमाई में होटल, परिवहन, संचार और सेवाएं 47.0 प्रतिशत सिकुड़ी थी और इस तिमाही में इसमें 15.6 फीसदी की गिरावट आई है। वित्त सेवाओं और रियल एस्टेट क्षेत्र पिछली बार 5.3 फीसदी सिकुड़ा था लेकिन इस तिमाही में यह आंकड़ा और ख़राब होकर -8.6 फीसदी हो गया।

लेकिन, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने सकारात्मक प्रदर्शन किया है। पिछली तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग में 39.3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई लेकिन इस बार 0.6 की वृद्धि दर्ज़ की है। इसी तरह कृषि क्षेत्र और कृषि और बिजली, गैस, पानी की आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं के क्षेत्र में ग्रोथ दर्ज हुई है।

बता दें कि जून तिमाही की जीडीपी के आँकड़े स्वतंत्रता के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में सबसे ख़राब प्रदर्शन थे। तब जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून की पहली तिमाही के लिए भारत की जीडीपी -23.9 प्रतिशत पर पहुंच गयी थी। यही नहीं अप्रैल-जून की तिमाही के दौरान कृषि को छोड़कर सभी क्षेत्रों में ज़बरदस्त गिरावट देखी गयी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार के.वी सुब्रह्मण्यम ने जीडीपी के आँकड़ों को उत्साहवर्धक बताते हुए कहा कि भारत को अर्थव्यवस्था और महामारी दोनों ही मामलों में सजग रहने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान डिजिटल भुगतान में ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज हुई जिससे अर्थव्यवस्था मज़बूत हुई है। लगातार 2 तिमाही में सकारात्मक प्रदर्शन करने वाले कृषि क्षेत्र को उन्होंने अर्थव्यवस्था का बेहद ज़रूरी अंग बताया।

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