ads

कर्ज़ माफ़ी: हज़ारों करोड़ के ऐलान, पर राहत न पाये किसान

by Ankush Choubey 4 months ago Views 1546

मध्य प्रदेश में साल 2018 में 36 हज़ार 500 करोड़ रुपये की क़र्ज़ माफ़ी का ऐलान हुआ था लेकिन आँकड़ोंं की माने तो 11 हज़ार 912 करोड़ की क़र्ज़ माफ़ी ही हुई।

Debt forgiveness: Thousands of crores declared, bu
देश में कही भी जब चुनाव आते हैं, नेता वादों की झड़ी लगा देते है। देश की लगभग 54 फीसदी आबादी खेती से जुडी है तो क़र्ज़ में डूबे किसानों के लिए क़र्ज़ माफ़ी का वादा आमतौर पर किया जाता है। सरकारें भी हज़ारों करोड़ की क़र्ज़ माफ़ी का ऐलान करती हैं लेकिन किसानों का बड़ा तपका फिर भी बेहाल ही रहता है। देखिये यह ख़ास रिपोर्ट और समझिये गणित।

बिहार की गया लोकसभा सीट से जेडीयू सांसद विजय कुमार ने लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से सवाल पूछा था कि उन राज्यों का नाम और ब्योरा क्या है जिन्होंने किसानों के ऋण माफ करने की घोषणा की है। इसके जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा कहा गया कि भारत सरकार राज्यों द्वारा घोषित ऋण माफी के डाटा का रख-रखाव नहीं करती है। राज्य सरकारें अपने निर्णयों के अनुसार अपने संसाधनों से कृषि ऋण माफी की घोषणा करती हैं। लेकिन उन्होंने सरकारी संस्था नाबार्ड (नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चर ऐंड रूरल डेवलेपमेंट)  द्वारा संकलित राज्यों की सूची और राज्यों द्वारा घोषित कृषि ऋण माफी योजनाओं का संक्षिप्त विवरण दिया था। नाबार्ड के आंकड़ों के मुताबिक


मध्य प्रदेश में साल 2018 में 36 हज़ार 500 करोड़ रुपये की क़र्ज़ माफ़ी का ऐलान हुआ था लेकिन आँकड़ोंं की माने तो 11 हज़ार 912 करोड़ की क़र्ज़ माफ़ी ही हुई। मध्य प्रदेश की कुल आबादी करीब 7 करोड़ 26 लाख है और यहाँ 55 फीसदी यानी करीब 4 करोड़ लोग कृषि से जुड़े हुए है। लेकिन मध्य प्रदेश में सिर्फ 20 लाख 23 हज़ार किसानों द्वारा सहकारी और राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए 2 लाख रुपये तक के क़र्ज़ ही माफ़ हुए।

ऐसा ही कुछ हुआ पंजाब में, जहा 2017 में 10 हज़ार करोड़ की क़र्ज़ माफ़ी का प्रस्ताव हुआ था, लेकिन आंकड़ों की मानें तो 4 हज़ार 696.09 करोड़ की ही क़र्ज़ माफ़ी हुई। जनगणना 2011 के अनुसार पंजाब की कुल आबादी करीब 2 करोड़ 77 लाख है और इनमें से 35 फीसदी यानी 96 लाख 95 हज़ार आबादी कृषि से जुडी हुई है। इसमें महज़ 5 लाख किसानों के 2 लाख तक के क़र्ज़ माफ़ हुए हैं।

महाराष्ट्र में भी 2017 में 34 हज़ार 22 करोड़ रुपए के क़र्ज़ माफ़ी का प्रस्ताव हुआ लेकिन आंकड़ों के मुताबिक 19 हज़ार 833.54 करोड़ की ही क़र्ज़ माफ़ी हुई। महाराष्ट्र की लगभग 13 करोड़ की आबादी में से 64.14 फीसदी यानि करीब 8 करोड़ की आबादी कृषि से जुडी हुई है। इनमे महज़ 48 लाख उन किसानों के क़र्ज़ माफ़ हुए जिनके उपर 1.5 लाख से कम का क़र्ज़ था।

इन किसानों में वो लोग कतई शामिल नहीं है जिन्होंने साहूकार या किसी व्यक्ति से क़र्ज़ उठाया हो। इन आँकड़ों से ज़ाहिर है कि सरकारें मात्र चुनाव जीतने के लिए क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा कर देती हैं लेकिन किसानों के बड़े हिस्से तक ये राहत शायद ही पहुँच पाती है।

ताज़ा वीडियो