Budget 2022: शिक्षा, स्वास्थ्य, सोशल वेल्फेयर पर सरकार की कम ख़र्च करने की योजना !

by M. Nuruddin 4 months ago Views 4141

Budget 2022: Government plans to spend less on edu
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार का चौथा आम बजट 1 फरवरी 2022 को संसद में पेश कर दिया है। इस बजट में ख़ासतौर पर कनेक्टिविटी को बढ़ाने की दिशा में ज़ोर दिया गया है। यही वजह है कि वित्त मंत्री ने ट्रांसपोर्ट बजट को 40 फीसदी बढ़ा दिया।

किसान के भारी विरोध के बाद भी एमएसपी के लिए आवंटन में कटौती की गई है और कृषि बजट में मामूली बढ़ोत्तरी की गई है।


इसके मुक़ाबले सोशल वेल्फेयर पर सरकार की कम ख़र्च करने की योजना है। कमोबेश यही हाल शिक्षा और स्वास्थ्य का भी है जिसका बजट ट्रांसपोर्ट बजट के मुक़ाबले कम है।

चार साल के अपने सबसे छोटे बजट भाषण में वित्त मंत्री ने 39.45 लाख करोड़ रूपये का बजट पेश किया है। इनमें सबसे ज़्यादा 11.8 लाख करोड़ केन्द्रीय क्षेत्र की योजनाओं और परियोजनाओं पर होने वाले ख़र्च के लिए आवंटन की योजना है।

मसलन यहां यह समझने की ज़रूरत है कि यह बजट ख़ासतौर से परियोजनाओं पर ख़र्च के लिए पेश किया गया है। इसका मतलब है कि इस एक साल में देश में विकास होता हुआ दिखाई पड़ सकता है।

इनके अलावा केन्द्रीय क्षेत्र पर होने वाले ख़र्च के लिए 11.3 लाख करोड़ रूपये दिया गया है जिसका आम तौर पर पेंशन, तनख़्वाह इत्यादि पर ख़र्च किया जा सकता है।

मुख्य सात क्षेत्रों पर केन्द्रीय बजट का आंकलन करें तो पता चलता है कि सरकार का कृषि क्षेत्र में होने वाली सभी एक्टिविटी के लिए 1.51 लाख करोड़ रूपये ख़र्च का अनुमान है जो वित्त वर्ष 2021-22 में 1.48 लाख करोड़ के मुक़ाबले सिर्फ 2 फीसदी ज़्यादा है।

इनके अलावा शिक्षा बजट में 11.1 फीसदी, स्वास्थ्य बजट में 14.8 फीसदी, ग्रामीण विकास के बजट में 5.8 फीसदी और शहरी विकास के बजट में 3.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है।

हालांकि सोशल वेलफ्येर के बजट में सिर्फ 6.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है जिसका मतलब है कि सरकार को ग़रीबी और ग़रीबों की कोई फिक़्र नहीं है। मसलन भारत हंगर इंडेक्स में 116 देशों में 101वें स्थान पर है जिसका मतलब है कि करोड़ों भारतीय भूखा सोने को मज़बूर हैं।

इनके अलावा अन्य योजनाएं हैं जिसका सीधा फायदा ग़रीबों की ग़रीबी पर पड़ता है उन योजनाओं पर सरकार इस साल में ख़र्च कम कर सकती है। जबकि इसके मुक़ाबले अगर ट्रांसपोर्ट की बात करें तो सरकार ने सबसे ज़्यादा 40 फीसदी बजट इसी क्षेत्र का बढ़ाया है। मसलन सरकार की ट्रांसपोर्ट पर 2021-22 में 2.34 लाख करोड़ रूपये के मुक़ाबले 2022-23 में 3.52 लाख करोड़ रूपये ख़र्च करने की योजना है।

इससे ज़ाहिर है कि, 80 करोड़ ग़रीबों की परेशानी जस की तस रहने वाली है। मतलब थाली में खाना नहीं लेकिन आसमान में उड़ान भरने के लिए एयरपोर्ट और यात्राओं के लिए रेलवे और सड़क की सुविधा ज़रूर मिलेगी।

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