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सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, जीवनसाथी की बेइज़्जती करने पर भी तलाक मुमकिन

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अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि जब जीवनसाथी की प्रतिष्ठा सहयोगियो, वरिष्ठों और समाज में तार तार कर दी जाती है, तो पीड़ित पक्ष से ऐसे व्यवहार के लिए माफी की उम्मीद करना मुश्किल है।

सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, जीवनसाथी की बेइज़्जती करने पर भी तलाक मुमकिन

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक आदेश में कहा कि सहकर्मियों, वरिष्ठों के सामने जीवनसाथी का अपमान करना भी तालाक का आधार बन सकता है।  ऐसा कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की ओर से वरिष्ठों को दी गयी शिकायत और तमाम अन्य आरोप लगाने को मानसिक क्रूरता मानते हुए एक सैन्य अधिकारी की तलाक की अर्ज़ी स्वीकार कर ली है।

सैन्य अधिकारी की पत्नी ने कई वरिष्ठ अधिकारियों और महिला निकायों में उसके खिलाफ शिकायतें की थी। इस मामले में जस्टिस दिनेश महेश्वरी और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि पत्नी का इस तरह अपमान सहना निश्चित रूप से क्रूरता है। 

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि जब जीवनसाथी की प्रतिष्ठा सहयोगियो, वरिष्ठों और समाज में तार तार कर दी जाती है, तो पीड़ित पक्ष से ऐसे व्यवहार के लिए माफी की उम्मीद करना मुश्किल है। इस तरह की परिस्थितियों में अन्याय करना वाला पक्ष यह उम्मीद नहीं कर सकता कि उसका वैवाहिक जीवन बना रहे। अदालत ने कहा कि मानसिक क्रूरता को तालाक का एक आधार माना गया है। 

सैन्य अधिकारी की शादी 2006 में उत्तराखंड में एक शिक्षिका के साथ हुआ था। शादी के एक साल बाद ही अनबन के चलते दोनों पति पत्नी अलग अलग रहने लगे थे। इसके बाद अधिकारी की पत्नी ने अपने पति पर धोखाधड़ी और दहेज़ की माँग करने के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। 

 

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