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देश में विदेशी टीकों के आयात पर राहुल गांधी ने कविता लिख केंद्र पर साधा निशाना

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दरअसल कुछ दिनों पहले राहुल गांधी ने सरकार से मांग की थी कि विदेशी वैक्सीन को भी देश में प्रयोग की अनुमति दी जाए. इस पर केंद्रिय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने राहुल की आलोचना की थी

देश में विदेशी टीकों के आयात पर राहुल गांधी ने कविता लिख केंद्र पर साधा निशाना

भारत में कोरोना की दूसरी लहर के चलते लगातार रोज़ आने वाले नए मामलों में बढ़ोतरी हो रही है वहीं देश के कई राज्यों से टीकाकरण रोके जाने की खबर आ रही है. राज्यों का कहना है कि वैक्सीन खत्म होंने के कारण उन्हें टीकाकरण का काम रोकना पड़ा है. इस बीच केंद्र की ओर से अब विदेशी वैक्सीन का इस्तेमाल देश में किए जाने का फैसला किया गया है.

सरकार के इस निर्णय पर राहुल गांधी ने निशाना साधा है. उन्होंने ट्विटर पर महात्मा गांधी के एक कोट के ज़रिए केंद्र पर तंज कसा. राहुल ने लिखा, “पहले वह तुम्हें नज़रअंदाज करेंगे. फिर वह तुम्हारा उपहास करेंगे. फिर वह तुमसे लड़ेंगे और फिर तुम जीत जाओगे.”

दरअसल कुछ दिनों पहले राहुल गांधी ने सरकार से मांग की थी कि विदेशी वैक्सीन को भी देश में प्रयोग की अनुमति दी जाए. इस पर केंद्रिय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने राहुल की आलोचना की थी और उन पर विदेशी कंपनियों के लिए लॉबिंग करने का आरोप लगाया था.

भारत में फिलहाल स्वदेशी वैक्सीन से टीकाकरण किया जा रहा है. टीकाकरण अभियान की शुरूआत में सब ठीक रहा लेकिन अब कई राज्य अपने वहां वैक्सीन की कमी की शिकायत कर रहे हैं. इस बीच सरकार ने टीकाकरण नीति में बदलाव लाने का निर्णय किया है. पहले जहां भारत में सिर्फ घरेलु वैक्सीन से टीकाकरण किया जा रहा था वहीं अब विदेशों में बनी और इस्तेमाल की मंज़ूरी पा चुकी कोरोना वैक्सान भी भारत में आयात की जाएगी.

नेशनल एक्‍सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्‍सीन एडिमिनिस्‍ट्रशन फॉर कोविड-19 ने भारत सरकार को प्रस्ताव दिया कि विदेशों में बनी वैक्सीन और जिन्हें यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, पीएमडीए और जापान से मंज़ूरी मिल चुकी है और जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की सूची में शामिल हैं, इन टीकों को भी भारत में आपातकाल इस्तेमाल की मंज़ूरी दी जाए. एनईडीवीएसी के इस प्रस्ताव को सरकार ने मंज़ूरी दे दी है.

इसके अलावा विशेषज्ञ समीति ने ये भी प्रस्ताव दिया है कि देश में आयात की जाने वाली वैक्सीन को पहले सिर्फ 100 लोगों को ही दिया जाएगा और उन लोगों की सात दिनों तक निगरानी की जाएगी और इसके बाद ही इसे टीकाकरण में शामिल किया जाएगा.    

  

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