JDU की मांग, पिछड़े वर्ग की जनसंख्या की भी हो गणना

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JDU की मांग, पिछड़े वर्ग की जनसंख्या की भी हो गणना

केंद्र सरकार द्वारा संसद में कहा गया है कि 2021 में होने वाली जनगणना में सिर्फ दलित और अनुसूचित जनजातियों की आबादी की गणना की जाएगी. इसके अलावा अन्य जातियों के आंकड़े नहीं होंगे. इसके एक दिन बाद बिहार में भाजपा की सहयोगी जेडीयू ने पिछड़ा वर्ग की भी आबादी की गणना की मांग की है.

जदयू के ससंदीय बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ओबीसी की सही आबादी की जानकारी हो. उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह जरूरी है कि ओबीसी की सही आबादी की जानकारी हो. यहां तक कि उच्चतम न्यायालय ने ऐसी राय रखी है. पूर्व में की गयी इस तरह की गणना की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए. इसके साथ ही जातिगत आधार पर नियमित जनगणना की जानी चाहिए. उन्होंने इसके अलावा न्यायपालिका में आरक्षण की भी मांग की. 

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने मंगलवार को कहा कि आगामी राष्ट्रीय जनगणना में दलितों और अनुसूचित जनजातियों के अलावा अन्य जाति के आंकड़े नहीं होंगे.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, नित्यानंद राय ने एक लिखित उत्तर में कहा, “महाराष्ट्र और ओडिशा की राज्य सरकारों ने आगामी जनगणना में जाति विवरण एकत्र करने का अनुरोध किया है. भारत सरकार ने नीति के तहत एससी और एसटी के अलावा अन्य जाति-वार आबादी की गणना जनगणना में नहीं करने का निर्णय लिया है.

नित्यानंद राय ने एक और सवाल का जवाब देते हुए कहा कि 2021 की जनगणना करने की सरकार की मंशा 28 मार्च, 2019 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित की गई थी, लेकिन COVID-19 के प्रकोप के कारण गतिविधियों को स्थगित कर दिया गया था.

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