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वैक्सीन के कच्चे माल की कमी, सीरम इंस्टीट्यूट की अमेरिकी राष्ट्रपति से निर्यात पर प्रतिबंध हटाने की अपील

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वैक्सीन के कच्चे माल की कमी, सीरम इंस्टीट्यूट की अमेरिकी राष्ट्रपति से निर्यात पर प्रतिबंध हटाने की अपील

सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से कोविड वैक्सीन के प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘अगर हम सच में कोविड से लड़ने के लिए एकजुट होना चाहते हैं, तो मैं विनम्रतापूर्वक आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध हटाएं। आपके प्रशासन को इस बारे में सभी जानकारी है।’

इसको लेकर एलियन नाम के एक ट्विटर यूज़र ने इसकी आलोचना की। ट्विटर यूज़र ने ट्वीट किया कि ‘शर्म की बात है! सरकार चुनाव में व्यस्त है और कोई और सरकार की ड्यूटी कर रहा है। किसी को सबसे ख़राब शासन का एक और नमूना चाहिए?’

एक अन्य 'ह्युमनिटी एबव ऑल' नाम के ट्विटर यूज़र ने लिखा, 'भारत की वैक्सीन की स्थिति विकट है। आदर्श रूप से भारतीय पीएम को अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछना चाहिए। चूंकि हमारे पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं, इसलिए उद्योगपतियों को टीके के लिए कच्चे माल की तलाश के लिए सीधे POTUS से संपर्क करना होगा। हो सकता है @राहुल गांधी पीएम मोदी की अनुपस्थिति में पूछ सकते हैं।'

ग़ौरतलब है कि सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ का ये बयान वैक्सीन सप्लाई में आई देरी को लेकर ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका के लीगल नोटिस के बाद आया है। इस बारे में पूछे जाने पर अदार पूनावाला ने कोई भी जवाब देने से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि इस बारे में केन्द्र सरकार जानती है। 

अदार पूनावाला ने इससे पहले भी एक बयान जारी किया था जिसमें उन्होंने वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए 3000 करोड़ रूपये की ज़रूरत की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इससे जून तक वैक्सीन प्रोडक्शन कैपेसिटी 110 मिलियन प्रति महीने तक बढ़ाने में कंपनी को मदद मिलेगी। सीरम इंस्टीट्यूट ने अबतक वैक्सीन की 100 मिलियन घरेलू और 60 मिलियन बाहरी देशों को सप्लाई कर चुका है।

देश में कोरोना वैक्सीन की किल्लत हो गई है। कई राज्यों में वैक्सीनेशन सेंटर को बंद करना पड़ा है। हालांकि केन्द्र सरकार में गृह मंत्री और ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में चुनावी सभाएं कर रहे हैं। रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है लेकिन कोरोना नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। दूसरी तरफ देश में कोरोना संक्रमण से हालात बदतर हो गए हैं।

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